नई शिक्षा नीति का स्वागत परंतु....?
संपादकीय@हरेश पंवार परिवर्तन प्रकृति का नियम है। देशकाल वातावरण के अनुसार परिवर्तन होना बहुत जरूरी है। वर्तमान समय की मांग है की शिक्षा नीति में बदलाव होना बहुत जरूरी महसूस किया जा रहा था। मनुष्य के सर्वांगीण विकास के आवश्यक तत्व माने जाने वाले शिक्षा के पाठ्यक्रम में किए गए बदलाव यानी शिक्षा नीति में परिवर्तन स्वागत योग्य है। लेकिन शिक्षा नीति में किए गए परिवर्तन का क्या ये मार्ग सही है। इस विषय पर मूल्यांकन होना जरूरी भी है। पुरानी शिक्षा नीति और वर्तमान नई शिक्षा नीति के तुलनात्मक अध्ययन पर एक दृष्टि डालें तो आखिर पुरानी शिक्षा नीति की क्या खामियां थी। जिसे बदलना जरूरी था। और वर्तमान शिक्षा नीति में लागू गई कौन सी अच्छाई है जिसे प्रमुखता से लागू किया जाना आवश्यक है सरकार द्वारा संसद में बिना बहस के शहर स्वीकार किया जाना कहीं खामियां तो नहीं छोड़ दी है। महज औपचारिकताओं के साथ किए गए शिक्षा नीति के बदलाव के संदर्भ में मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। नई शिक्षा नीति की जरूरत थी, इस पर कोई मतभेद नहीं हो सकता। 34 साल में देश की स्थिति और जरूरतें बदल जाती हैं, यह आम समझ है। इसलिए नरे...