घर से गायब हुआ सहज योग और रोगों का प्रवेश
[6/19, 06:12] Adv. Haresh Panwar: संपादकीय *घर से गायब हुआ सहज योग और रोगों का प्रवेश* *प्राकृतिक जीवनशैली से दूरी, कृत्रिम योग की मजबूरी* मानव सभ्यता के विकास की कहानी केवल तकनीकी प्रगति की कहानी नहीं है, बल्कि यह जीवनशैली में आए व्यापक परिवर्तनों की भी कहानी है। आधुनिकता ने मनुष्य को अनेक सुविधाएँ प्रदान की हैं, लेकिन इन सुविधाओं की कीमत उसने अपने स्वास्थ्य, श्रम और प्राकृतिक जीवनचर्या को खोकर चुकाई है। आज हम योग शिविरों, जिम, फिटनेस सेंटरों और स्वास्थ्य अभियानों के माध्यम से स्वस्थ रहने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि कभी हमारी दैनिक दिनचर्या ही योग का सबसे बड़ा विद्यालय हुआ करती थी। वास्तव में, आज जिस योग को हम कृत्रिम रूप से सीखने और करने का प्रयास कर रहे हैं, वह कभी हमारे जीवन का सहज और स्वाभाविक हिस्सा था। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। ग्रामीण जीवन में सुबह का आरंभ ही श्रम और योग से होता था। पशुओं के लिए चारा काटना, घास लाना, दूध दुहना, दही बिलोना, कुएँ से पानी निकालना, पनघट से मटके भरकर लाना, खेतों में काम करना और घर-गृहस्थी के छोटे-बड़े कार्य—ये सभी शर...