Posts

Showing posts from October, 2024

आत्मसम्मान और मनोबल की शक्ति

Image
संपादकीय 23 अक्टूबर 2024।   * आत्मसम्मान और मनोबल की शक्ति * मान्यवर कांशीराम ने हमेशा शोषित, मजदूर और गरीब वर्गों को आत्मसम्मान और मनोबल की शक्ति के बारे में सिखाया। उन्होंने कभी मुफ्त अनाज का आह्वान नहीं किया, बल्कि इन वर्गों को देश के शासक होने का एहसास कराया। इस संदर्भ में मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। उनके नेतृत्व में बसपा सरकार ने गरीब छात्रों को फ्री शीट एडमिशन दिलवाकर उच्च प्रोफेशनल शिक्षा दिलवाई। आज इन वर्गों का युवा मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी कर रहा है। मान्यवर कांशीराम के संदेशों को ग्रहण करने से मनोबल मिलता है, जो हर समस्या को हल कर सकता है। उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए, हमें अपने लक्ष्यों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए और विपत्ति को अवसर में बदलना चाहिए। मान्यवर कांशीराम ने कहा कि कठिन समय में भी अपने लक्ष्य को मत छोड़िये।विपत्ति को अवसर में बदलिए।देश के संसाधनों पर आपका अधिकार है । शोषित,मजदूर एवम गरीब वर्गों को पांच किलो फ्री अनाज देकर सरकार एहसान जताती है जबकि मान्यवर साहब कांशीराम  ने कभी मुफ्त अनाज का आह्वान नहीं किया था। उसकी जगह उन्...

सहयोग, सुख और आनंद का भाव: जीवन की अनिवार्यता

संपादकीय। 18 October 2024 *सहयोग, सुख और आनंद का भाव: जीवन की अनिवार्यता*  जीवन में हमें कई तरह के अनुभव प्राप्त होते हैं, जिनमें सहयोग, सुख और आनंद प्रमुख हैं। इन तीनों का आपसी संबंध है और ये एक दूसरे के पूरक हैं। इस संदर्भ में मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।       हम सभी के लिए एक दूसरे का सहयोग जरूरी हैं ।  एक के बिना दूसरा अधूरा है । जैसे दिन और रात, अंधकार और प्रकाश, सुख और दुख आदि सभी परस्पर सहयोगी हैं । एक का ना होना दूसरे के लिए होने के द्वार खोलता है । उसी प्रकार दूसरे का होना पहले के लिए न होने का प्रतीक बनता है ।        सुख अन्तिम नहीं है, आता है, जाता है । सुख में सम्पन्नता, आकर्षण और समृद्धि दिखाई देती है, लेकिन अन्दर से चंचलता, अधूरापन और असंतोष के भाव निरन्तर बने रहते हैं, वहीं आनंद में बाहर से भले ही विभिन्नता दिखाई देती हो, परंतु अन्दर से मस्ती, खुशी और अल्हड़़पन्न का आकर्षण होता है ।            *सहयोग: जीवन की आधारशिला*  सहयोग हमारे जीवन की आधारशिला है। यह हमें एक दूसरे के साथ जोड़ता ...

सफलता की दो धाराएं: गर्व और अहंकार*

संपादकीय। 19 October 2014  " *सफलता की दो धाराएं: गर्व और अहंकार*  सफलता एक ऐसी भावना है जो हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। जब हम अपने लक्ष्य में सफल होते हैं, तो हमारे अंदर विनम्रता और संतुष्टि की भावना उत्पन्न होती है, जिसे हम गर्व कहते हैं। लेकिन जब सफलता हमारी क्षमता से अधिक हमारे दिमाग में चढ़ जाती है, तो वह अहंकार का रूप ले लेती है। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।         अक्सर इंसान अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करता है और जब वह अपने लक्ष्य में सफल होता है तब इंसान के अंदर विनम्रता और संतुष्टि की भावना उत्पन्न होती है । इसी भावना को गर्व कहते हैं। लेकिन जब सफलता क्षमता से अधिक दिमाग में चढ़ जाती है तब वह अहंकार का रूप ले लेती है । जीवन में गर्व जरूरी है क्योंकि इससे इंसान का ह्रदय विशाल होता है, लेकिन अहंकार से नहीं क्योंकि इससे दिमाग चढ़ता है । इंसान का दिल जितना बड़ा बनेगा, इंसान में उतनी अधिक विनम्रता पैदा होगी । इसलिए अपनी सफलता पर गर्व करें और अहंकार से बचे रहें । *गर्व: एक सकारात्मक भावना...

संकट की राह पर सफलता की मंजिल*

Image
संपादकीय@ एडवोकेट हरेश पंवार #दिनांक 13अक्टूबर2024 *संकट की राह पर सफलता की मंजिल* जीवन में संकट और चुनौतियाँ हमें कमजोर नहीं बनाती, बल्कि हमें मजबूत और सफल बनाने का अवसर प्रदान करती हैं। अक्सर लोग संकट के समय हड़बड़ा जाते हैं, लेकिन जो लोग संकटों के बीच रहकर मुस्कुराना जानते हैं, संकटों से जूझ कर जीना जानते हैं, वही लोग आने वाले समय में सफलता के हकदार होते हैं और सुखमय जीवनयापन करते हैं। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।      हर कार्य में अच्छाई देखने वालों के लिए संकट हमेशा सफलता का मार्ग बनता है । यदि आप चाहते हैं कि कुछ ऐसा कार्य करें, जिसकी सराहना पूरे समाज, रिश्तेदारों व मित्रों में हो तो अभी से संकट के मार्ग को तलाशना शुरू कर दें । इसका अवसर उसका अगला पड़ाव और प्रगति मंजिल है ।       अक्सर संकट के समय लोग हड़बड़ा जाते हैं । हालांकि संकट के समय धैर्य व सूझबूझ की आवश्यकता होती है और जो लोग संकटों के बीच रहकर मुस्कुराना जानते हैं, संकटों से जूझ कर जीना जानते हैं, वही लोग आने वाले समय में सफलता के हकदार होते हैं और सुखमय जीवनयापन करत...

सफलता की राह में आलस्य: एक बड़ा अवरोध*

Image
*सफलता की राह में आलस्य: एक बड़ा अवरोध* आलस्य मानव की एक सामान्य प्रवृत्ति है, लेकिन इसके नकारात्मक प्रभाव हमारी सफलता की राह में बड़ा अवरोध बनते हैं। आलस्य के कारण हम अपने लक्ष्यों से दूर होते जाते हैं और हमारी उन्नति रुक जाती है। इसलिए, यह समझना आवश्यक है कि आलस्य क्या है, इसके कारण क्या हैं, और इससे निदान पाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। इस संदर्भ में मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। आलस्य को हम किसी कार्य को टालने, अनिच्छा से कार्य करने, समय पर कार्य न करने, और अपने लक्ष्य के प्रति लापरवाह होने के रूप में परिभाषित कर सकते हैं। आलस्य के प्रभाव हमारे जीवन पर बहुत गहरे होते हैं। यह हमें अपने लक्ष्यों से दूर रखता है, हमारी उत्पादकता को कम करता है, और हमारे आत्मविश्वास को कमजोर करता है। सफलता, परिश्रम और पुरुषार्थ की राह में आलस्य एक बड़ा अवरोध है। आलस्य मानव की एक सामान्य प्रवृत्ति है जिसके हमेशा नकारात्मक प्रभाव ही पड़ते हैं। किसी कार्य को टालना, अनिच्छा से कार्य करने का प्रयास करना या समय पर कार्य ना करना और अपने लक्ष्य के प्रति लापरवाह होकर सक्षमता से अधिक सोना आदि सभी आल...

स्वाभिमान और प्रतिष्ठा की भूख

Image
संपादकीय  *स्वाभिमान और प्रतिष्ठा की भूख*  आजकल के समय में, हम अक्सर देखते हैं कि लोग अपने स्वाभिमान को खोने के लिए तैयार हो जाते हैं बस इसलिए कि वे धन, ख्याति, मान-प्रतिष्ठा, पद और सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं। लेकिन क्या यह सही है? मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। स्वाभिमान हमारी अस्मिता और गरिमा की रक्षा करने की शक्ति देता है। यह हमें अपने जीवन को स्वयं बनाने की ताकत देता है। लेकिन जब हम धन, ख्याति, मान-प्रतिष्ठा, पद और सत्ता के लिए लालची हो जाते हैं, तो हम अपने स्वाभिमान को खोने के लिए तैयार हो जाते हैं। धन की तरह ख्याति और मान-प्रतिष्ठा की महत्वाकांक्षा भी संसार में भारी विपत्ति उत्पन करने वाली सिद्ध होती है। पद, सत्ता और अधिकार के लोभ में उतने ही अनर्थ होते हैं जितने धन-लिप्सा से होते हैं। यह हमें अपने जीवन को स्वयं बनाने की शक्ति को खोने के लिए मजबूर करता है। लेकिन सच बात यह है कि बिना पदाधिकारी बने कोई भी व्यक्ति किसी संस्था की अधिक ठोस सेवा कर सकता है। परंतु लोगों को सेवा की नहीं, प्रतिष्ठा की भूख रहती है। फलस्वरूप सार्वजनिक संगठनों को कलह का अखाड़ा ब...

प्रसन्नता की खोज अंतर्मन की यात्रा

Image
संपादकीय@हरेश पवार 10 अक्टूबर 2024 *प्रसन्नता की खोज अंतर्मन की यात्रा* प्रसन्नता और सुख का सम्बन्ध व्यक्ति के अन्तर्मन से है। यह एक ऐसी भावना है जो हमारे जीवन में खुशियों का संचार करती है। लेकिन, क्या हमने कभी सोचा है कि प्रसन्नता और सुख का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या यह केवल बाहरी आयोजनों और समारोहों से प्राप्त होता है, या फिर यह हमारे अन्तर्मन में बसा हुआ है? मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।         प्रसन्नता और सुख का सम्बन्ध व्यक्ति के अन्तर्मन से है।आदमी खुशियों के लिए आयोजन करता है, अपने बच्चों का बर्थ-डे मनाता है। अपने यहां भोज का आयोजन करता है, सौ-दो सौ लोग आते हैं, पंडाल बंधता है, विविध प्रकार के पकवान बनते हैं। दो घंटे की खुशियां नजर आती है, लोग खाना खाकर चले जाते हैं और फिर वही सन्नाटा पसर आता है। खुशियों के समारोह अन्ततः सन्नाटा देकर ही जाते हैं।         बड़े बुजुर्गो कहते हैं:- जीवन में जो मिले उसे प्रेम से स्वीकार करें। प्रसन्नता तो वह चंदन है, जिसे आप भी प्रतिदिन अपने शीश पर धारण करो और यदि कोई व्यक्ति आपके द्वारे ...

मां: ममता और संस्कार की पाठशाला

Image
संपादकीय@एडवोकेट हरेश पवार (7 अक्टूबर 2024) *मां: ममता और संस्कार की पाठशाला*          मांँ संसार का सबसे खूबसूरत शब्द है। मांँ कहते ही कलेजा भर आता है, जबान मीठी हो जाती है और आंखों से गंगा-जमुना बहने लगती है। जहां में जिसका अंत नहीं, उसे आसमां कहते हैं, ममता में जिसका अंत नहीं, उसे मांँ कहते हैं। माँ हिमालय की तरह ऊंची है, परंतु हिमालय की तरह कठोर नहीं। माँ सागर की तरह गहरी है, परंतु सागर की तरह खारी नहीं।        मांँ वायु की तरह गतिशील है, परंतु वायु की तरह अदृश्य नहीं। मां प्रकृति की तरह महान है, परंतु प्रकृति की तरह दुर्लभ नहीं। मांँ की कोई उपमा नहीं हो सकती क्योंकि माँ कभी उप...माँ नहीं होती। मांँ ममता का महाकाव्य, त्याग का महायज्ञ और संस्कार की पाठशाला है। मांँ से ही जीवन की शुरुआत है और माँ ही हर दुख-दर्द की दवा है। मांँ साक्षात पूजनीय देवी है वास्तव में मैं बोलूंगा तो फिर पाओगे कि बोलता है।           मां, संसार का सबसे खूबसूरत शब्द, जिसका उल्लेख होते ही हमारे कलेजे भर आते हैं और जुबान में मिठास घु...

एक देश, एक चुनाव, चुनौतीपूर्ण और पथरीला मार्ग

Image
संपादकीय@हरेश पंवार   21 September 2024  *एक देश, एक चुनाव, चुनौतीपूर्ण और पथरीला मार्ग*  एक देश अनेक चुनाव को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए भारत में एक देश एक चुनाव करवाई जाने के पक्ष में जो दलीलें दी गई हैं। विपक्ष ने इसे निरंकुश करार भी दिया है। हालांकि यह एक जटिल प्रक्रिया एवं चुनौतीपूर्ण पथरीला मार्ग है। अमूमन देखने में रह आया है कि देश में जहां कम सीटों पर उप चुनाव हुए हैं वहां सत्ता पक्ष ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करते हुए निरंकुशता पर उतरी है। यह अलग बात है कि जनता ने लोकतंत्र की हिफाजत में कई बार करारा जवाब भी दिया है। आजादी के बाद देश में आम चुनाव शुरू  हुए। उस वक्त एक देश एक चुनाव की स्थिति थी। लिहाजा तब सत्तारूढ़ कांग्रेस का निरंकुश व्यवहार जनता के पक्ष में नहीं था। वर्तमान में यदि एक देश एक चुनाव की स्थिति बनती है तो वर्तमान सत्तारूढ़ सरकार का निरंकुश व्यवहार जनता के पक्ष में नहीं होगा और लोकतंत्र की निष्पक्षता को जरूर प्रभावित करेगा इस संदर्भ में मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। हालांकि केंद्रीय कैबिनेट ने ‘एक देश, एक चुनाव’ की अनुश...

*जीवन का चार्जर - ध्यान*

Image
संपादकीय। 6 October 2024  *जीवन का चार्जर - ध्यान*   दुनिया का रिवाज है कि यहां ज्ञान से ज्ञान बढ़ता है और पैसे से पैसा। सफलता का संबंध महज व्यापार या केरियर से नहीं है। सबके साथ विनम्रता और मिठास से पेश आना, रिश्तेदारों के साथ सहयोग करना और स्वार्थों से ऊपर उठकर गैर इंसानों के काम आना भी सफलता के ही आयाम है।         गलत और विपरीत वातावरण बन जाने पर भी खुद पर संयम और धैर्य रखना भी सफलता की ही निशानी है। अपनी कार्यशैली को इतना बेहतर बनाइए कि आपके कदमों की आहट भी दूसरों की किस्मत बदल डालें। व्यक्ति के जीवन को चार्ज करने वाले सेतु का नाम ध्यान है ज्ञान के संदर्भ में मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।      जीवन के प्रत्येक पल का आनंद लीजिए, प्रत्येक पल को आनंदपूर्ण बनाइये। अपनी विचारधाराओं में हम जब, जो, जैसा चैनल चलाएंगे, दृश्य,चिंतन और प्रेरणाय वैसी ही प्रकट होनी शुरू होगी। अच्छी प्रेरणाओं के लिए दिमाग में हमेशा अच्छा चैनल चलाइए। अपने दिमाग के आले में जमे हुए जाले को साफ कीजिए। चिंता, तनाव, क्रोध, कुंठा की मकड़ियाँ इसमें रात...

सही और गलत: जीवन की वास्तविकता

Image
सही और गलत: जीवन की वास्तविकता 1 अक्टूबर 2024 आज के समय में, जहां दुनिया तेजी से बदल रही है, वहीं हमारे रिश्ते और विचार भी बदल गए हैं। लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव आया है, और यह बदलाव हमारे जीवन को प्रभावित कर रहा है। यह मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। जो जैसा दिखता है, वो वैसा होता नहीं है, और जो जैसा है, वह वैसा दिखता नहीं है। यह सच्चाई हमें अक्सर अपने आसपास देखने को मिलती है। कभी हम किसी के व्यक्तित्व के कारण धोखा खा जाते हैं, तो कभी हमारे दृष्टिकोण के कारण हमें सच्चाई नहीं दिखाई देती। आज के समय में, निंदा करना एक आम बात हो गई है। लोग आपको भरपूर निंदा करेंगे, लेकिन प्रशंसा करना एक दुर्लभ बात हो गई है। ज्यादातर लोग मजबूरी या स्वार्थ में प्रशंसा करते हैं, न कि सच्चे दिल से। रिश्तों की बात करें, तो आज के समय में रिश्ते थोड़े हल्के हो गए हैं। लोग अपने स्वार्थ के लिए रिश्तों को तोड़ने से नहीं हिचकिचाते। यदि आप किसी से नाराज़ हों, तो लोग आपको छोड़ना पसंद करेंगे, मनाना नहीं। लेकिन फिर भी, जीवन में कुछ सच्चाइयाँ ऐसी हैं जो नहीं बदलतीं। भावनाओं के पांव नहीं होते, फिर भ...

बचपन: जीवन की सबसे अनमोल अवस्था।

Image
संपादकीय।  2 अक्टूबर 2024  *बचपन: जीवन की सबसे अनमोल अवस्था।*  कोई लौटा दे मेरे बचपन को.... गीत को सुनकर मन अलादीत हो उठता है। बचपन की कुछ यादें जीवन भर की धरोहर में शामिल हो जाती है जब भी बचपन के शाखा से हम मिलते हैं तो वह मधुर यादें, शरारते यह सब याद करके हम अपने मासूमियत वाले बचपन की यादों के सहारे कई बार जीवन की उतराई में खुद के बचपन के समीप चले जाते हैं। वैसे तो बचपन शब्द ही मासुमियत और स्नेह से भरा हुआ है। बचपन को याद कर हमारा मन करता है कि चिंता और द्वेष रहित यह अवस्था यों ही अनवरत चलती रहे, लेकिन यह सम्भव नहीं है तो फिर क्यों ना किसी भी आयु में हम बचपन के मनोहर पल चुरा अपनी झोली में भरकर आनंदविभोर हो लें। ऐसे में थोड़ा सा बचपन अपने भीतर जीवित रखने में कोई हानि नहीं है। मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।          बच्चों से थोड़ी सी मासुमियत, निस्वार्थ भावना अपने में समेट लेना । बचपन में लौट पाना तो सम्भव नहीं है, परंतु बच्चों के साथ प्रकृतीय सुख की अनुभूति कराने के लिए पर्याप्त है। उनके संग तुतलाना, घुटनों के बल चलना, खेलना क...