मां: ममता और संस्कार की पाठशाला

संपादकीय@एडवोकेट हरेश पवार (7 अक्टूबर 2024)

*मां: ममता और संस्कार की पाठशाला* 
        मांँ संसार का सबसे खूबसूरत शब्द है। मांँ कहते ही कलेजा भर आता है, जबान मीठी हो जाती है और आंखों से गंगा-जमुना बहने लगती है। जहां में जिसका अंत नहीं, उसे आसमां कहते हैं, ममता में जिसका अंत नहीं, उसे मांँ कहते हैं। माँ हिमालय की तरह ऊंची है, परंतु हिमालय की तरह कठोर नहीं। माँ सागर की तरह गहरी है, परंतु सागर की तरह खारी नहीं।
       मांँ वायु की तरह गतिशील है, परंतु वायु की तरह अदृश्य नहीं। मां प्रकृति की तरह महान है, परंतु प्रकृति की तरह दुर्लभ नहीं। मांँ की कोई उपमा नहीं हो सकती क्योंकि माँ कभी उप...माँ नहीं होती। मांँ ममता का महाकाव्य, त्याग का महायज्ञ और संस्कार की पाठशाला है। मांँ से ही जीवन की शुरुआत है और माँ ही हर दुख-दर्द की दवा है। मांँ साक्षात पूजनीय देवी है वास्तव में मैं बोलूंगा तो फिर पाओगे कि बोलता है।
         
मां, संसार का सबसे खूबसूरत शब्द, जिसका उल्लेख होते ही हमारे कलेजे भर आते हैं और जुबान में मिठास घुल जाती है। मां की ममता और संस्कार जीवन के लिए एक अनमोल उपहार है, जो हमें जीवन के हर कदम पर प्रेरित और सशक्त बनाते हैं।

मां की ममता का कोई अंत नहीं है, जैसे कि आसमां का कोई अंत नहीं। वह हमेशा हमारे लिए उपलब्ध रहती है, हमारे हर दुख-दर्द की दवा बनकर। मां हिमालय की तरह ऊंची है, लेकिन कठोर नहीं; सागर की तरह गहरी है, लेकिन खारी नहीं। वह वायु की तरह गतिशील है, लेकिन अदृश्य नहीं।
मां की उपमा नहीं हो सकती, क्योंकि वह कभी उपमा नहीं होती। वह ममता का महाकाव्य, त्याग का महायज्ञ और संस्कार की पाठशाला है। जीवन की शुरुआत मां से होती है, और हर दुख-दर्द की दवा भी मां ही होती है। वह साक्षात पूजनीय देवी है, जो हमें जीवन के हर कदम पर मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करती है।
मां की भूमिका जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वह हमें जीवन के मूल्यों को सिखाती है, हमें सही और गलत के बीच का अंतर समझाती है, और हमें जीवन के हर कदम पर साहस और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
आज के युग में, जब हम अपने जीवन में व्यस्तता और तनाव के बीच खो जाते हैं, मां की ममता और संस्कार हमें जीवन के सही मूल्यों की याद दिलाते हैं। वह हमें सिखाती है कि जीवन में क्या महत्वपूर्ण है, और कैसे हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।
मां के प्रति हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनकी ममता और संस्कार को अपने जीवन में आत्मसात करें, और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलें। हमें मां का सम्मान करना चाहिए, उनकी बात माननी चाहिए, और उनके द्वारा दिए गए मूल्यों को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
मां, हमारे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है। उनकी ममता और संस्कार हमें जीवन के हर कदम पर प्रेरित और सशक्त बनाते हैं। आइए, हम मां के प्रति अपना सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करें, और उनकी ममता और संस्कार को अपने जीवन में आत्मसात करें।

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