दूसरों को गिराकर नहीं, उठाकर मिलती है असली ऊँचाई
संपादकीय@ 25.02.2026 *दूसरों को गिराकर नहीं, उठाकर मिलती है असली ऊँचाई* समाज में हम अक्सर ऐसे लोगों से रूबरू होते हैं जो दूसरों को छोटा दिखाकर स्वयं को बड़ा साबित करने की कोशिश करते हैं। वे आलोचना, उपहास और तिरस्कार के माध्यम से यह जताने का प्रयास करते हैं कि वे श्रेष्ठ हैं। लेकिन गहराई से देखें तो यह व्यवहार आत्मविश्वास का नहीं, बल्कि अंदरूनी डर और असुरक्षा का संकेत होता है। जो व्यक्ति अपनी काबिलियत को लेकर आश्वस्त नहीं होता, वही दूसरों को नीचा दिखाकर स्वयं को “सुरक्षित” महसूस करना चाहता है। मैं यहां बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। मानव मनोविज्ञान बताता है कि असुरक्षा की भावना व्यक्ति को नकारात्मक प्रतिक्रियाओं की ओर धकेलती है। जब किसी को लगता है कि उसकी तुलना में दूसरा अधिक सक्षम, लोकप्रिय या सफल है, तो वह ईर्ष्या का शिकार हो सकता है। यह ईर्ष्या कई बार स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में बदल सकती है, लेकिन जब आत्मसम्मान की कमी होती है, तो यही भावना दूसरों को गिराने के प्रयास में परिवर्तित हो जाती है। व्यक्ति को भ्रम होता है कि यदि सामने वाला कमजोर दिखेगा, तभी वह स्वयं मज...