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Showing posts from June, 2020

बेहतरीन रिजल्ट देने वाले शिक्षक अब संकट में ?

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संपादकीय@एडवोकेट हरेश पंवार   शिक्षा के व्यवसायीकरण में एक और जहां सरल एवं सुलभ शिक्षा मुहैया करवाने में प्राइवेट शिक्षण संस्थानों का बड़ा योगदान रहा है। देश में साक्षरता दर और शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर बढ़ाने में प्राइवेट स्कूलों व कॉलेजों का बड़ा योगदान रहा है। इसे सिरे से नहीं निकारा जा सकता है। निवर्तमान समय तक उच्च माध्यमिक स्तर तक पढ़ाई का स्तर सरकारी विद्यालय से ज्यादा विश्वसनीय प्राइवेट स्कूलों का रहा है। इसे भी सिरे से नहीं नकारा जा सकता। सरकारी विद्यालय की साख बड़ी दयनीय है। लेकिन कोरोना की इस महामारी की वजह से प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक काफी संकट में हताश व निराश दिखाई दे रहे हैं। तो सरकारी विद्यालयों के शिक्षक अपने आपको ज्यादा महफूज समझते हुए गुलकिया करते नजर आ रहे हैं। सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को पूरा वेतन और छुट्टियों का वेतन मिलने की वजह से उनकी आर्थिक स्थिति में कोई ज्यादा परिवर्तन नहीं होने से उनकी सामाजिक स्थिति में भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। जबकि प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक की हालात कामगार मजदूर से भी बदतर नाजुक हालत से गुजर रहे हैं। वे अपनी दू...

यूथ को अपराध की ओर धकेलती ऑनलाइन शिक्षा

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                   भीम प्रज्ञा संपादकीय@ हरेश पंवार जो इस दुनिया में यूथ ने नहीं देखा वह यूट्यूब के जरिए देखा जा सकता है। ऑनलाइन शिक्षा के तहत पॉजिटिव एजुकेशन के चैप्टर कम मिलेंगे। नेगेटिव एनर्जी व नकारात्मक शिक्षा का अपार भंडार यूट्यूब पर भरा पड़ा है। बच्चों को निकम्मा और निठल्ला बनाने वाली ऑनलाइन शिक्षा के जरिए प्राथमिक व पूर्व प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों के साथ साथ सेकेंडरी सीनियर सेकेंडरी एजुकेशन प्राप्त करने वाले युथ जिसे कैरियर काउंसलिंग और डिसिप्लिन के चैप्टर शिक्षक के सामने सीखने की जरूरत है। वे एकांत में अभिभावकों की आंखों में धूल झोंककर साइबर क्राइम की ओर बढ़ते नजर आ रहा है। देश में तेजी से बढ़ रहे अपराध के आंकड़े चिंता का विषय है। ऑनलाइन एजुकेशन के जरिए कुछ विद्यालयों में बच्चों को इतना भारी भ्रामक गृह कार्य दिया जाता है। जिससे विद्यार्थी कुछ ही समय में विचलित होकर नेटवर्क के जरिए मनोरंजन की दुनिया से होते हुए सेक्सुअल क्राइम की ओर बढ़ जाता है। जो गूगल डिस्प्ले पर सबसे आगे अमूमन पेश करता रहता है। यह एक बड़ा चिं...

कोरोना वायरस ने दी दहेज प्रथा को चुनौती।

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        संपादकीय @एडवोकेट हरेश पंवार।  मनुष्य सामाजिक बुराइयों से लिप्त होकर भौतिकवादी दौड़ में ऐसे संसाधनों का अंधानुकरण कर रहा है। जिसके चलते समाज में प्रतिस्पर्धा का भाव उत्पन्न हो गया है‌। आज सामाजिक आहार व्यवहार में परिवर्तन इस कदर तक पहुंच गया कि आम व्यक्ति की समझ से परे है। सामाजिक बुराइयों का विकराल रूप सामाजिक संरचना के विखंडन का कारण बनता जा रहा है। बहुत सी कुरीतियां समाज में कुष्ठ रोग की तरह से फैली हुई है। लेकिन दहेज प्रथा एक बहुत बड़ी सामाजिक बुराई थी। उस पर अंकुश लगाने के लिए समाज सुधारकों ने सर पटक पटक कर। मंचों पर उपदेशात्मक भाषणों द्वारा चिल्ला चिल्ला कर एवं पोथियों में कोटेशन लिख लिख कर तमाम तरीके के संसाधनों द्वारा दहेज प्रथा पर अंकुश लगाने के अथक प्रयास जारी रखें।लेकिन यह सामाजिक बुराइयां टस से मस होने का नाम नहीं ले रही थी और  कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान होने वाली शादियों में बिना तामझाम को देखकर लगता है, कि दहेज प्रथा पर अब अंकुश लगाने की बारी आई गई। कहीं न कहीं कोरोना वायरस की वजह से चल रहा यह लाॅक डाउन दहेज प्रथा पर जरूर रो...

आरक्षण को लेकर सरकार की नियत में खोट।

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संपादकीय@हरेश पंवार   आरक्षण को लेकर कई बार पक्ष- विपक्ष में तीखी एवं तल्ख टिप्पणी सुनने को मिलती रहती हैं। कहीं आरक्षण को खैरात बताया जाता है। तो कहीं आरक्षण को मौलिक अधिकार की दलील दी जाती है। पर इस बीच में न्यायपालिका का सहारा लेकर सरकारे ज़रूर ठेंगा दिखाने में कोताही नहीं बरतती है। जब जब देश में आपातकालीन जैसी विषम परिस्थितियां नजर आयी हैं और मौजूदा सरकार जैसे ही सवालों के घेरे में घिरती नजर आयी है। तो जनता का ध्यान मुद्दे से भटकाने के लिए आरक्षण पर गोचाबाजी कर मुद्दे से भटका दिया जाता है। पिछले कुछ समय से ऐसा ही देखा जा रहा है। जब भी कोई चुनाव नजदीक आता है तो सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरक्षण का पिटारा खोलकर वोटों का समीकरण बैठाया जाता है। हाल ही में राज्यसभा चुनाव एवं बिहार के चुनाव को मद्देनजर रखते हुए नीट के रिजर्वेशन मामले में तमिलनाडु हाईकोर्ट के जजमेंट पर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर टिप्पणी करते हुए कहां की आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं। इस फैसले के बाद देश में फिर से आरक्षण पर बवाल खड़ा कर जंग छिड़ दी है। वैसे ही व्यवस्था में कुंडली मारे...

मौसम / भीषण उमस के बाद जोधपुर में जमकर बरसे बदरा, गर्मी से मिली थोड़ी राहत

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जोधपुर.  पश्चिमी राजस्थान में शुक्रवार दोपहर एक बार फिर मौसम पूरी तरह से बदल गया। दोपहर पश्चात जोधपुर के ग्रामीण क्षेत्र में शुरु हुई बारिश जोधपुर तक पहुंच गई और शहर में झमाझम बारिश से सड़कों पर पानी बहने लग गया। तेज हवा के साथ आई बारिश से एक बार भीषण उमस से राहत मिली, लेकिन बारिश बंद होते ही उमस फिर बढ़ गई। वहीं पाली व जालोर के ग्रामीण क्षेत्र में भी अच्छी बारिश हुई है। जोधपुर में आज सुबह से मौसम एकदम साफ था और तेज धूप निकली हुई थी। धूप के साथ उमस भरी गर्मी ने लोगों को पसीने से भिगो कर रख दिया। लोगों को न तो घर में और न ही बाहर राहत मिल रही थी। करीब चार बजे मौसम बदल गया और आसमान में घने काले बादल छा गए। तेज हवा चलना शुरू हो गई। थोड़ी देर में बारिश का दौर शुरू हो गया। तेज हवा के साथ हुई जोरदार बारिश से मौसम में ठंडक घुल गई। बारिश का दौर करीब आधे घंटे तक चला। इस दौरान मकानों की छतों से परनाळे बह निकले और सड़कों पर हर तरफ पानी बहना शुरू हो गया। भीषण गर्मी से त्रस्त लोगों ने बारिश में स्नान कर गर्मी से राहत पाई। बारिश बंद होते ही एक बार फिर उमस बढ़ गई। फिलहाल आसमान में बादल छाए हुए है। वही...