बेहतरीन रिजल्ट देने वाले शिक्षक अब संकट में ?
संपादकीय@एडवोकेट हरेश पंवार शिक्षा के व्यवसायीकरण में एक और जहां सरल एवं सुलभ शिक्षा मुहैया करवाने में प्राइवेट शिक्षण संस्थानों का बड़ा योगदान रहा है। देश में साक्षरता दर और शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर बढ़ाने में प्राइवेट स्कूलों व कॉलेजों का बड़ा योगदान रहा है। इसे सिरे से नहीं निकारा जा सकता है। निवर्तमान समय तक उच्च माध्यमिक स्तर तक पढ़ाई का स्तर सरकारी विद्यालय से ज्यादा विश्वसनीय प्राइवेट स्कूलों का रहा है। इसे भी सिरे से नहीं नकारा जा सकता। सरकारी विद्यालय की साख बड़ी दयनीय है। लेकिन कोरोना की इस महामारी की वजह से प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक काफी संकट में हताश व निराश दिखाई दे रहे हैं। तो सरकारी विद्यालयों के शिक्षक अपने आपको ज्यादा महफूज समझते हुए गुलकिया करते नजर आ रहे हैं। सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को पूरा वेतन और छुट्टियों का वेतन मिलने की वजह से उनकी आर्थिक स्थिति में कोई ज्यादा परिवर्तन नहीं होने से उनकी सामाजिक स्थिति में भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। जबकि प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक की हालात कामगार मजदूर से भी बदतर नाजुक हालत से गुजर रहे हैं। वे अपनी दू...