श्रम की साधना: जिनके हाथों से सपने आकार लेते हैं"
*संपादकीय:* 1 मई 2025 *"श्रम की साधना: जिनके हाथों से सपने आकार लेते हैं"* "श्रम वह शक्ति है जो बंजर भूमि को हरियाली में बदल देती है, जो सपनों को हकीकत में गढ़ती है, और जो मानव सभ्यता को निरंतर आगे बढ़ाती है।" हर वर्ष 1 मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है — न सिर्फ एक औपचारिकता के रूप में, बल्कि श्रम की महत्ता और श्रमिकों के योगदान को सलाम करने के लिए। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सभ्यता की ऊंची इमारतें, तरक्की के पुल और विकास की राहें उन्हीं हाथों ने गढ़ी हैं, जिन पर अक्सर मेहनत की कठोर रेखाएं उकेरी होती हैं। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। मजदूर दिवस का उद्देश्य केवल अवकाश या समारोह नहीं है, बल्कि एक चेतना है — श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा, सम्मानजनक जीवन, न्यायोचित मजदूरी और बेहतर कार्य परिस्थितियों की वकालत करना। आज जब दुनिया नयी टेक्नोलॉजी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ओर बढ़ रही है, तब भी श्रमिक वर्ग की भूमिका अपरिवर्तित है। कोई भी तकनीक उनकी कर्मठता और समर्पण को पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकती। समाज और नीति-निर्माताओं का यह नैतिक दायित्...