बदले की आग नहीं, जीवन की रोशनी चुनिए

संपादकीय 
10 अप्रैल 2025 
“बदले की आग नहीं, जीवन की रोशनी चुनिए”

“एक बार जंगल में आग लग गई, सभी जानवर इधर-उधर भागने लगे। एक छोटी चिड़िया बार-बार अपनी चोंच में पानी भरकर आग बुझाने की कोशिश कर रही थी। एक शेर ने मज़ाक में पूछा – ‘तू इस छोटे से पानी से क्या आग बुझा पाएगी?’ चिड़िया बोली – ‘शायद आग न बुझे, लेकिन मेरी कोशिश में बदले की आग नहीं, जीवन बचाने की भावना है।’जहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
यही है सोच जो आज के इंसान को भी अपनानी चाहिए – बदले की आग में जलने से बेहतर है जीवन को रोशन करने की दिशा में आगे बढ़ना। बदला नहीं, बेहतर बनने का प्रयास करें। जब कोई हमें ठेस पहुंचाता है, हमारा आत्मसम्मान, विश्वास या भावनाएं चोटिल होती हैं, तो मन में प्रतिशोध की ज्वाला उठना स्वाभाविक है। लेकिन यही वह क्षण होता है जब हमें तय करना होता है कि हम 'प्रतिक्रिया देंगे या प्रगति करेंगे।'
किसी ने आपको गिराया, और आपने भी उसे गिरा दिया – फिर आप दोनों में क्या फर्क रह गया? सच्ची समझदारी तो तब है जब आप उस चोट को प्रेरणा बना लें, और खुद को इतना ऊपर उठा लें कि वही लोग आपके क़दमों की आहट सुनने को मजबूर हो जाएं।
धैर्य ही सच्चा प्रतिशोध है। प्रतिशोध के लिए क्रोध नहीं, धैर्य चाहिए। तत्काल प्रतिक्रिया अक्सर विनाश का कारण बनती है। बहुत बार लोग क्रोध में आकर ऐसा कदम उठा लेते हैं, जिसका पछतावा उन्हें जीवन भर करना पड़ता है।
जोश में होश खो बैठना आसान है, परन्तु होश में रहकर जोश दिखाना ही असली साहस है। याद रखिए, किसी को माफ़ करना कमज़ोरी नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि आप किसी भी नकारात्मकता से बड़े हैं।
संस्कार, व्यवहार और सम्मान – ये ही असली हथियार हैं
समस्याओं का समाधान तलवार से नहीं, संस्कारों से होता है। जब आपके भीतर व्यवहार की विनम्रता, सम्मान का भाव और विचारों की परिपक्वता होती है, तब कोई भी परिस्थिति कठिन नहीं रहती।
कोई आपको तकलीफ़ दे गया, उसका धन्यवाद करें – उसने आपको सिखाया कि आगे कैसे संभलना है। जो साथ छोड़ गया, उसकी कद्र करें – उसने दिखाया कि कौन आपके जीवन का स्थायी पात्र है।
 बदले की भावना भी वक्त के साथ बहुत कुछ बदलता है । यदि आप अपनी ऊर्जा प्रतिशोध में नहीं लगाकर स्वयं को बेहतर बनाने में लगाएं, तो समय एक दिन खुद न्याय कर देगा। जो आपको गिराने में लगे थे, वे खुद अपने कर्मों के बोझ से दब जाएंगे।
आपका काम है – खुद को इतना मजबूत और शांत बनाना कि आपकी कामयाबी ही आपके लिए सबसे बड़ा जवाब बन जाए।
 स्वाभिमान की विजय, प्रतिशोध से कहीं ऊंची होती है। जीवन में अगर कोई चीज़ खोने से कुछ नहीं जाता, तो वह है मतलबी लोगों का साथ। अगर उन्हें छोड़ देने में हार नजर आती है, तो ऐसी हार हर रोज़ स्वीकार की जानी चाहिए।
क्योंकि अंततः जीवन उस चिड़िया की तरह बनाना है – जो आग नहीं फैलाती, बल्कि बुझाने की कोशिश करती है।
बदले की भावना नहीं, बल्कि समझदारी, शांति और सशक्तता से जिया गया जीवन ही सबसे बड़ा विजय है।

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