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Showing posts from September, 2024

आत्मज्ञान और कर्ज का मायाजाल

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संपादकीय  25-09-2024 *आत्मज्ञान और कर्ज का मायाजाल*  मनुष्य का जीवन एक अनोखी यात्रा है, जिसमें वह अपने अस्तित्व की खोज में लगा रहता है। लेकिन दुर्भाग्यवश, अधिकांश लोग अपने जीवन के अंतिम समय तक अपने बारे में पूर्ण ज्ञान नहीं प्राप्त कर पाते। वे तुच्छ सांसारिक व नश्वर उपलब्धियों को हासिल करने की अंधी दौड़ में लगे रहते हैं, जो उन्हें अस्थायी सुख व संतुष्टि प्रदान करती हैं। लेकिन जब जीवन की अंतिम सांस आती है, तो मनुष्य को एहसास होता है कि उसने अपने जीवन में जो कुछ भी कमाया था, वह कितना तुच्छ व नश्वर था। उसके द्वारा एकत्रित किया गया धन व दौलत मिट्टी के मूल्य के समान है, जो उसके जीवन को सच्ची संतुष्टि व शांति नहीं दे सकता। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। आत्मज्ञान ही एकमात्र ऐसी चीज है जो मनुष्य को सच्ची संतुष्टि व शांति प्रदान कर सकती है। आत्मज्ञान से ही हमें अपने जीवन का सही उद्देश्य व अर्थ समझने की क्षमता मिलती है। यह हमें अपने जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है और हमें अपने अस्तित्व की सच्ची खोज में मदद करता है। लेकिन आत्मज्ञान प्राप्त करना...

सहनशीलता की शक्ति: जीवन को सकारात्मक बनाने का मंत्र

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संपादकीय। 26-09-2024 *सहनशीलता की शक्ति: जीवन को सकारात्मक बनाने का मंत्र* सहनशीलता के अभाव में छोटी-छोटी बातों में घरेलू झगड़े के इतने बड़े कारण बन जाते हैं। जो बड़े से बड़े और ऊंचे औधे वाले परिवारों की दीवारें भी हिलने लगती है। सहनशीलता के अभाव में परिवार और रिश्तेदारी के मधुर संबंध में भी दरार आ जाते हैं आज सहनशीलता के अभाव में घरेलू रिश्तो की जड़े हिल जाती हैं और न्यायालय के दरवाजे पर अपने अहंकार को जीतने के लिए एक दूसरे का तेल काट देना जलते हैं ऐसी स्थिति में हमें मूल्यांकन करना चाहिए की सहनशीलता के बल पर दुनिया की कायनात को जीता जा सकता है। एस असहनशीलता के अभाव में स संतोष की बीमारी भी पांव फसार लेती है। आजकल के समय में, हम अपने आसपास कई ऐसे लोगों को देखते हैं जो छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित हो जाते हैं और नकारात्मक प्रतिक्रिया करते हैं। यह समस्या न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि समाज और परिवार में भी दिखाई देती है। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि इसका कारण क्या है और इसका समाधान क्या हो सकता है? इस संदर्भ में मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। छोटी-छोटी बातों पर क्रोध...

समाज व परिवार की ताकत: प्रेम का महत्व

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संपादकीय  20 सितंबर 2024  *समाज व परिवार की ताकत: प्रेम का महत्व"*  मनुष्य जीवन में जद्दोजहद आरम्भ से चली आ रही है जो आज भी है और आगे भी रहेगी । परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहती । कभी मनुष्य के सम्मुख और कभी विरोधी होती हैं, जो संघर्ष के बिना सम्भव नहीं है । सफलता की मंजिल पाने के लिए मनुष्य को मानसिक रूप से तैयार रहना ही हितकारी है ।       वहीं क्षमता से अधिक संघर्ष की स्थिति में अक्सर मनुष्य का साहस टूटने लगता है । वह इतना भयभीत हो जाता है कि वह संघर्ष की चुनौती को स्वीकार करना ही छोड़ देता है ‌और इस स्थिति में ऐसे लोगों के लिए भाग्य के दरवाजे बंद ही रहते हैं और वह हमेशा शोषण, अत्याचार व गुलामी का शिकार बना रहता है क्योंकि जीवन में कुछ  किए बिना अपनी मंजिल हासिल करना सम्भव नहीं है । प्रेम समाज व परिवार की ताकत है, जो हमें एकजुट रखता है और हमारे रिश्तों को मजबूत बनाता है। यह हमें सिखाता है कि खुद से गलती हो गई तो माफी मांगे और दूसरे से गलती हो गई तो माफ कर दें। माफी मांगना और गले लगाना संसार की सबसे अच्छी जादू की झप्पी है। समाज व परिवा...

केजरीवाल की चुनावी रणनीति या राजनीतिक कुर्बानी ?

संपादकीय।   *केजरीवाल की चुनावी रणनीति या राजनीतिक कुर्बानी?*  दिल्ली की राजनीति में एक नए मोड़ के साथ, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह चुनावी रणनीति है या राजनीतिक कुर्बानी? केजरीवाल के इस कदम के पीछे क्या मंशा है, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि दिल्ली की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। केजरीवाल के इस्तीफे के बाद, आम आदमी पार्टी (आप) ने अपनी रणनीति बदल दी है। केजरीवाल अब चुनाव तक अंतरिम मुख्यमंत्री आतिशी के नेतृत्व में सरकार चलाएंगे। लेकिन क्या यह रणनीति काम करेगी? दिल्ली की जनता केजरीवाल को फिर से जनादेश देगी या नहीं, यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है। केजरीवाल के इस्तीफे के पीछे एक और कारण हो सकता है - सर्वोच्च अदालत की कड़ी शर्तें। केजरीवाल के खिलाफ आपराधिक मामले अदालत के विचाराधीन हैं, और अदालत की शर्तों के कारण उनके हाथ बंधे हुए हैं। लेकिन क्या यह इस्तीफा उनकी ईमानदारी को साबित करने के लिए पर्याप्त होगा? दिल्ली की जनता के लिए यह सवाल है कि क्या उन्हें साफ-सुथरी सरकार नसीब होगी? केजरीवाल के इस्तीफे के ...