पीड़ा परखने वाला ही असली जौहरी होता है"

संपादकीय
11 अप्रैल 2025 महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती। 

*"पीड़ा परखने वाला ही असली जौहरी होता है"* 
“हीरे की परख हर कोई नहीं कर सकता, और इंसान की पीड़ा समझना तो और भी दुर्लभ कला है। किसी के आँसू पढ़ लेना, उनके मौन में छिपा दर्द जान लेना—यही तो है इंसानियत की असली चमक।”आज के इस भागदौड़ भरे और स्वार्थ से भरे युग में लोग अक्सर दूसरों की हैसियत, कपड़े, सफलता और शोहरत पर ध्यान देते हैं, पर किसी की आंतरिक पीड़ा, उसकी मानसिक स्थिति या टूटी आत्मा पर शायद ही किसी की नज़र जाती है।
हीरा चमकता है, लेकिन दर्द चुपचाप सहता है।हीरे की पहचान करने वाला जौहरी सम्मान पाता है क्योंकि वह कीमती चीज़ की क़द्र करता है। लेकिन जो किसी टूटे हुए दिल, बिखरे मन और पीड़ा से भरे जीवन को समझने की कोशिश करता है—वह समाज का सबसे मूल्यवान व्यक्ति होता है।
किसी की मुस्कान के पीछे छिपे आँसुओं को देख लेना, और बिना कहे किसी की तकलीफ़ को महसूस कर लेना, ये गुण बाज़ार में नहीं मिलते। ये संवेदनशीलता और मानवीयता के सबसे ऊंचे स्तर की निशानी हैं।
हर मुस्कान के पीछे कहानी होती है। हम अक्सर लोगों को हंसते हुए देखते हैं और मान लेते हैं कि वे खुश हैं। लेकिन हकीकत ये है कि असली दर्द वही होता है जो दिखाई नहीं देता।
कई बार कोई सिर्फ इसलिए मुस्कुराता है ताकि दूसरे परेशान न हों। ऐसे में जो व्यक्ति उस मुस्कान में भी छुपे आँसुओं को देख लेता है, वही होता है सच्चा जौहरी – वह हीरे से भी ज्यादा कीमती मनुष्य।
पहचान के लिए केवल सफलता नहीं, संवेदना से  भी पहचान बनती है। समाज में अक्सर सफल लोग चमकते हैं, लेकिन संवेदनशील लोग समाज को जोड़ते हैं। एक जौहरी अगर किसी पत्थर में हीरा ढूंढ सकता है, तो एक संवेदनशील व्यक्ति एक थके हुए इंसान में छुपी करुणा, आशा और सुंदरता को देख सकता है।
सच यह है कि किसी को उसकी पीड़ा के साथ अपनाना, उसे सहारा देना, और बिना बोले समझना—ये ऐसा उपहार है जो जीवन में अमिट छाप छोड़ जाता है।
आज के युग में समाज को ज़रूरत है पीड़ा परखने वालों की। आज जब रिश्ते सतही होते जा रहे हैं, संवाद औपचारिक होता जा रहा है, और सहानुभूति एक दुर्लभ गुण बनती जा रही है—तब इस समाज को जरूरत है ऐसे लोगों की जो सुनें, महसूस करें, और बांहें फैलाकर गले लगाएं।
हीरे को नज़र और उपकरण से परखा जा सकता है, लेकिन इंसान की पीड़ा को केवल दिल से परखा जा सकता है।
अगर हम हर दिन किसी एक व्यक्ति का दर्द थोड़ा सा कम कर सकें, उसके भीतर भरोसा भर सकें, तो समझिए कि हमने हीरा नहीं, एक आत्मा को चमकाया है। इसलिए आइए, हम भी असल जौहरी बनें।जिंदगी में चमकना तो सब चाहते हैं, लेकिन किसी के अंधेरे में रोशनी बनना—यही सच्ची चमक है। और वही इंसान असल जिंदगी का जौहरी कहलाता है।

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