प्रसन्नता की खोज अंतर्मन की यात्रा
संपादकीय@हरेश पवार 10 अक्टूबर 2024
*प्रसन्नता की खोज अंतर्मन की यात्रा*
प्रसन्नता और सुख का सम्बन्ध व्यक्ति के अन्तर्मन से है। यह एक ऐसी भावना है जो हमारे जीवन में खुशियों का संचार करती है। लेकिन, क्या हमने कभी सोचा है कि प्रसन्नता और सुख का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या यह केवल बाहरी आयोजनों और समारोहों से प्राप्त होता है, या फिर यह हमारे अन्तर्मन में बसा हुआ है? मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
प्रसन्नता और सुख का सम्बन्ध व्यक्ति के अन्तर्मन से है।आदमी खुशियों के लिए आयोजन करता है, अपने बच्चों का बर्थ-डे मनाता है। अपने यहां भोज का आयोजन करता है, सौ-दो सौ लोग आते हैं, पंडाल बंधता है, विविध प्रकार के पकवान बनते हैं। दो घंटे की खुशियां नजर आती है, लोग खाना खाकर चले जाते हैं और फिर वही सन्नाटा पसर आता है। खुशियों के समारोह अन्ततः सन्नाटा देकर ही जाते हैं।
बड़े बुजुर्गो कहते हैं:- जीवन में जो मिले उसे प्रेम से स्वीकार करें। प्रसन्नता तो वह चंदन है, जिसे आप भी प्रतिदिन अपने शीश पर धारण करो और यदि कोई व्यक्ति आपके द्वारे आए तो उसका भी उसी चंदन से तिलक करो। प्रसन्नता तो परफ्यूम की तरह है जिसे रोज सुबह ही अपने ऊपर छिड़क लिया जाना चाहिए।
आजकल, हम खुशियों के लिए आयोजन करते हैं, अपने बच्चों का बर्थ-डे मनाते हैं, भोज का आयोजन करते हैं, लेकिन क्या यह खुशियां हमें वास्तव में संतुष्ट करती हैं? या फिर यह केवल कुछ पलों के लिए ही हमें खुश रखती हैं? बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि जीवन में जो मिले उसे प्रेम से स्वीकार करें, प्रसन्नता तो वह चंदन है जिसे आप भी प्रतिदिन अपने शीश पर धारण करो और यदि कोई व्यक्ति आपके द्वारे आए तो उसका भी उसी चंदन से तिलक करो।
प्रसन्नता का वास्तविक अर्थ है अपने जीवन में संतुष्टि और शांति का अनुभव करना। यह केवल बाहरी आयोजनों से नहीं मिलता, बल्कि यह हमारे अन्तर्मन में बसा हुआ है। जब हम अपने जीवन में संतुष्ट और शांत रहते हैं, तो हम प्रसन्नता का अनुभव करते हैं।
उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति जो अपने परिवार के साथ समय बिताता है, अपने बच्चों के साथ खेलता है, अपनी पत्नी के साथ बातें करता है, वह प्रसन्नता का अनुभव करता है। वहीं दूसरी ओर, एक व्यक्ति जो अपने जीवन में संतुष्ट नहीं है, जो अपने परिवार के साथ समय नहीं बिताता, वह प्रसन्नता का अनुभव नहीं कर सकता।
इसलिए, हमें अपने जीवन में प्रसन्नता का अनुभव करने के लिए अपने अन्तर्मन को समझना होगा। हमें अपने जीवन में संतुष्टि और शांति का अनुभव करना होगा। हमें अपने परिवार के साथ समय बिताना होगा, अपने मित्रों के साथ बातें करनी होगी, और अपने जीवन में अच्छे काम करने होंगे।
प्रसन्नता और सुख का सम्बन्ध व्यक्ति के अन्तर्मन से है। यह केवल बाहरी आयोजनों से नहीं मिलता, बल्कि यह हमारे अन्तर्मन में बसा हुआ है। हमें अपने जीवन में संतुष्टि और शांति का अनुभव करना होगा, अपने परिवार के साथ समय बिताना होगा, और अपने जीवन में अच्छे काम करने होंगे। तभी हम प्रसन्नता का अनुभव कर सकते हैं।
1. प्रसन्नता और सुख का सम्बन्ध व्यक्ति के अन्तर्मन से है, न कि बाहरी आयोजनों से।
2. बाहरी आयोजनों से केवल कुछ पलों के लिए ही खुशी मिलती है, लेकिन वास्तविक प्रसन्नता अन्तर्मन में बसी होती है।
3. प्रसन्नता का वास्तविक अर्थ है अपने जीवन में संतुष्टि और शांति का अनुभव करना।
4. परिवार के साथ समय बिताना, मित्रों के साथ बातें करना, और अच्छे काम करना प्रसन्नता के लिए आवश्यक हैं
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