स्वाभिमान और प्रतिष्ठा की भूख

संपादकीय
 *स्वाभिमान और प्रतिष्ठा की भूख* 


आजकल के समय में, हम अक्सर देखते हैं कि लोग अपने स्वाभिमान को खोने के लिए तैयार हो जाते हैं बस इसलिए कि वे धन, ख्याति, मान-प्रतिष्ठा, पद और सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं। लेकिन क्या यह सही है? मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
स्वाभिमान हमारी अस्मिता और गरिमा की रक्षा करने की शक्ति देता है। यह हमें अपने जीवन को स्वयं बनाने की ताकत देता है। लेकिन जब हम धन, ख्याति, मान-प्रतिष्ठा, पद और सत्ता के लिए लालची हो जाते हैं, तो हम अपने स्वाभिमान को खोने के लिए तैयार हो जाते हैं।
धन की तरह ख्याति और मान-प्रतिष्ठा की महत्वाकांक्षा भी संसार में भारी विपत्ति उत्पन करने वाली सिद्ध होती है। पद, सत्ता और अधिकार के लोभ में उतने ही अनर्थ होते हैं जितने धन-लिप्सा से होते हैं। यह हमें अपने जीवन को स्वयं बनाने की शक्ति को खोने के लिए मजबूर करता है।
लेकिन सच बात यह है कि बिना पदाधिकारी बने कोई भी व्यक्ति किसी संस्था की अधिक ठोस सेवा कर सकता है। परंतु लोगों को सेवा की नहीं, प्रतिष्ठा की भूख रहती है। फलस्वरूप सार्वजनिक संगठनों को कलह का अखाड़ा बनाते और दुर्गतिग्रस्त होते आए दिन देखा जाता है।
आज के समय में, जब हमारे आसपास के लोग हमें अपने अहसानों के जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं, तब हमें अपने स्वाभिमान की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। किसी का अहसान अपने ऊपर मत होने दो, क्योंकि यह आपको एकांत की मृत्यु की ओर ले जा सकता है।
अहसान की परिभाषा है किसी की मदद करना, लेकिन जब यह मदद आपको अपने स्वाभिमान से दूर कर देती है, तो यह आपके लिए खतरनाक हो जाती है। लोग अहसानों के बदले आपको पीड़ादायक एकांत की मृत्यु मांगते हैं, और फिर आप सबके साथ होते हुए भी एक तरह से अकेले हो जाते हैं, बिल्कुल मुर्दे की तरह।
आपकी उत्तेजना के निर्झर झरने जो कभी आपके अंदर फुट रहे थे, सूख जाएंगे और इच्छाओं का जनाजा निकल जाएगा। इसलिए, अपनी इच्छाओं को खुद के दम पर पूरा करें, किसी के अहसानों के नीचे दबकर नहीं। अपने स्वाभिमान को जिंदा रखें, और कभी भी किसी के अहसान के आगे नहीं झुकें।
स्वाभिमान की रक्षा करना हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह हमें अपने आत्मसम्मान को बनाए रखने में मदद करता है, और हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रेरित करता है। इसलिए, अपने स्वाभिमान को जिंदा रखें, और कभी भी किसी के अहसान के आगे नहीं झुकें।
1. अपनी इच्छाओं को खुद के दम पर पूरा करें।
2. किसी के अहसानों के नीचे दबकर नहीं।
3. अपने आत्मसम्मान को बनाए रखें।
4. अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रेरित रहें।
5. कभी भी किसी के अहसान के आगे नहीं झुकें।
स्वाभिमान की रक्षा करना हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह हमें अपने आत्मसम्मान को बनाए रखने में मदद करता है, और हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रेरित करता है। इसलिए, अपने स्वाभिमान को जिंदा रखें, और कभी भी किसी के अहसान के आगे नहीं झुकें।

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