समय और शिक्षा : सफलता का अटूट गठबंधन

संपादकीय@हरेश पंवार #25/05/2026

समय और शिक्षा : सफलता का अटूट गठबंधन

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मनुष्य का जीवन अनेक अनुभवों, संघर्षों और अवसरों से मिलकर बना है, लेकिन इन सबके बीच दो ऐसी शक्तियाँ हैं जो किसी भी व्यक्ति के भविष्य की दिशा और दशा तय करती2q हैं—समय 22z शिक्षा। यदि समय को जीवन की सबसे मूल्यवान w awwwww कहा जाए और 3 www 2 को उस पूंजी का सही निवेश, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। वास्तव में यही दोनों तत्व किसी साधारण व्यक्ति को भी असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँचाने की क्षमता रखते हैं। जिस व्यक्ति ने समय का महत्व समझ लिया और शिक्षा को अपना हथियार बना लिया, उसके लिए जीवन में कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।

समय प्रकृति का वह सत्य है जो कभी रुकता नहीं। यह अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा, राजा-रंक सभी को बराबर मिलता है। हर इंसान के पास दिन के चौबीस घंटे ही होते हैं, लेकिन इन्हीं चौबीस घंटों का उपयोग किसी को सफल बना देता है और किसी को पछतावे की अंधेरी गलियों में छोड़ देता है। समय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक बार हाथ से निकल जाए, तो फिर कभी वापस नहीं आता। खोया हुआ धन दोबारा कमाया जा सकता है, टूटा हुआ संबंध भी जुड़ सकता है, लेकिन बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता। इसलिए जो लोग समय की कीमत नहीं समझते, वे धीरे-धीरे अवसरों से भी दूर हो जाते हैं।

आज के दौर में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया ने इंसान को सुविधाएं तो बहुत दी हैं, लेकिन समय की बर्बादी भी उतनी ही बढ़ा दी है। लोग घंटों मोबाइल स्क्रीन पर स्क्रॉल करते हुए गुजार देते हैं, लेकिन जब जीवन में असफलता सामने आती है, तब वे भाग्य और परिस्थितियों को दोष देने लगते हैं। सच तो यह है कि समय कभी किसी के साथ अन्याय नहीं करता, बल्कि इंसान स्वयं अपने समय के साथ अन्याय करता है। जो युवा आज अपने बहुमूल्य समय को मनोरंजन और दिखावे में गंवा रहे हैं, वही कल अवसरों के अभाव में निराशा और बेरोजगारी का सामना करते नजर आते हैं।

समय के साथ यदि कोई चीज सबसे अधिक आवश्यक है, तो वह है शिक्षा। शिक्षा केवल डिग्री लेने या परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं है। वास्तविक शिक्षा वह है, जो इंसान के भीतर सोचने, समझने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करे। शिक्षित व्यक्ति केवल नौकरी पाने के लिए नहीं पढ़ता, बल्कि वह अपने जीवन और समाज को बेहतर बनाने की समझ विकसित करता है। शिक्षा इंसान को आत्मनिर्भर बनाती है और उसे अंधविश्वास, संकीर्णता तथा मानसिक गुलामी से मुक्त करती है।

दुर्भाग्य की बात यह है कि आज शिक्षा का उद्देश्य भी धीरे-धीरे केवल नौकरी और पैसों तक सीमित होता जा रहा है। विद्यार्थियों पर अंकों की दौड़ इतनी हावी हो चुकी है कि नैतिक शिक्षा, व्यवहारिक ज्ञान और मानवीय संवेदनाएं पीछे छूटती जा रही हैं। शिक्षा का अर्थ केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है। यदि शिक्षा इंसान को विनम्र, संवेदनशील और जिम्मेदार नहीं बना रही, तो वह अधूरी है। आज समाज में बढ़ती हिंसा, भ्रष्टाचार और नैतिक पतन कहीं ना कहीं शिक्षा के इसी खोखलेपन की ओर संकेत करते हैं।

समय और शिक्षा का संबंध एक-दूसरे के बिना अधूरा है। यदि किसी के पास शिक्षा है लेकिन समय का सम्मान नहीं है, तो उसका ज्ञान भी व्यर्थ हो जाता है। वहीं यदि कोई समय का पाबंद है लेकिन शिक्षित नहीं है, तो वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ पाता। समय और शिक्षा का तालमेल ही सफलता का वास्तविक आधार बनता है। इतिहास गवाह है कि जिन्होंने अपने समय का सही उपयोग किया और शिक्षा को अपनी ताकत बनाया, वही समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा बने।

महात्मा ज्योतिराव फुले, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और भारत के अनेक महान व्यक्तित्व इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। कठिन परिस्थितियों, गरीबी और सामाजिक भेदभाव के बावजूद उन्होंने समय को व्यर्थ नहीं गंवाया और शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। यही कारण है कि उनका संघर्ष आज करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। बाबा साहेब ने कहा था कि “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।” इस संदेश में समय और शिक्षा दोनों की महत्ता छिपी हुई है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा पीढ़ी समय की कीमत को समझे और शिक्षा को केवल रोजगार नहीं, बल्कि आत्मनिर्माण का माध्यम माने। परिवारों और शिक्षण संस्थानों की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को केवल अंक लाने की मशीन ना बनाएं, बल्कि उन्हें समय प्रबंधन, अनुशासन और जीवन मूल्यों की शिक्षा दें। क्योंकि वही शिक्षा सार्थक है जो व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों से लड़ने का साहस दे।

अंततः यह कहना गलत नहीं होगा कि समय और शिक्षा जीवन के दो ऐसे पहिए हैं, जिन पर सफलता का रथ चलता है। यदि इनमें से एक भी कमजोर हो जाए, तो जीवन की यात्रा डगमगा जाती है। इसलिए जो व्यक्ति अपने समय का सम्मान करता है और शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानता है, वही भविष्य का निर्माता बनता है। आने वाला कल उन्हीं का होता है, जो आज अपने समय को संवारते हैं और शिक्षा के प्रकाश से अपने जीवन को दिशा देते हैं।

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