संपादकीय 24 अक्टूबर 2025 *थका हुआ मन ही सबसे पहले बूढ़ा होता है* कभी गौर किया है, कुछ लोग सत्तर की उम्र में भी हंसी, उम्मीद और ऊर्जा से भरे होते हैं, जबकि कुछ लोग तीस की उम्र में ही ज़िंदगी से हार मान चुके लगते हैं। इसका कारण शरीर की उम्र नहीं, बल्कि मन की थकान है। शरीर तो प्रकृति का हिस्सा है—वह समय के साथ झुकेगा, ढलेगा, बदलता रहेगा, परंतु मन यदि मजबूत है, तो शरीर की हर कमजोरी को हराया जा सकता है। बुढ़ापा दरअसल एक मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अपने भीतर की ऊर्जा, विश्वास और उम्मीद खो देता है। जब व्यक्ति यह सोचने लगता है कि अब कुछ नहीं हो सकता, तब वह मन से बूढ़ा हो जाता है। मन की थकान शरीर की थकान से कई गुना खतरनाक होती है, क्योंकि यह इंसान को जीते जी निराश बना देती है। यह मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। जीवन में दुख, दर्द और कठिनाइयां हर किसी के हिस्से में आती हैं। कोई भी इंसान उनसे अछूता नहीं है। फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग इन दुखों को अपनी ताकत बना लेते हैं, जबकि कुछ इन्हीं दुखों में डूबकर अपनी रौशनी खो देते हैं। दुख हमें तोड़ने नहीं, बल्कि हम...
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