सरकारी नौकरी के प्रति आकर्षण
संपादकीय
सरकारी नौकरी में व्यक्ति अपने आप को सबसे ज्यादा सुरक्षित समझता है। इसलिए सरकारी नौकरी पाने के लिए अच्छी खासी भीड़ हर प्रकार की वैकेंसी में देखी जा सकते हैं और सरकारी नौकरी पानी के लिए इस भीड़ के हिस्से में केवल बेरोजगारी नहीं है बल्कि प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे युवक भी अपने भाग्य की लकीरों को आजमाना चाहते हैं। प्राइवेट सेक्टर की जो यातनाओं को झेलना पड़ता है। शायद उसे आहत होकर युवक सरकारी नौकरी पाना चाहता है। सामाजिक रिश्तों में विवाह के लिए दूल्हा दुल्हन की तलाश में चार गोत्र टालने की परंपरा के साथ पंचम गोत्र सरकारी नौकरी की आवश्यकता प्राथमिक रहती है। सरकारी नौकरी का दवा सर्वगुण संपन्न है या नहीं कोई महीना नहीं रखता है विवाह के पक्ष कला का चरित्र आचरण अच्छा है या नहीं है कोई नहीं मैन रखना लेकिन सरकारी नौकरी है तो उसके वारे निवारे हैं। सरकारी नौकरी पाने वाले भीड़ के आलम को देखकर मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
सरकारी नौकरी के प्रति लगाव का बढ़ते जाना जहां स्वाभाविक है, वहीं विचारणीय भी है। देश में अगर कहीं भी कोई सरकारी भर्ती निकल रही है, तो वहां युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ रहा है। ताजा मिसाल, उत्तर प्रदेश से जुड़े आंकड़े हैं। उत्तर प्रदेश में करीब 60 हजार कांस्टेबल की भर्ती होनी है, पर उसके लिए 48 लाख से भी अधिक प्रार्थियों ने आवेदन कर रखा है। मोटे अनुमान के अनुसार, 80 में से मात्र एक को नौकरी नसीब होगी। फिर भी युवाओं को प्रयास करने का पूरा हक है और सभी को मौका भी मिलना चाहिए। उत्तर प्रदेश में जो भर्ती होने वाली है, उसमें राजस्थान, झारखंड, बिद्वार ही नहीं, मिजोरम तक के युवा भाग ले रहे हैं। मतलब, सरकारी नौकरी के प्रति हर जगह रुझान है। ऐसा भी नहीं है कि कांस्टेबल पद के लिए आवेदन करने वाले लाखों युवाओं में सभी बेरोजगार होंगे। निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे युवाओं ने भी आवेदन किया है. तो इसके पीछे उनकी यही सोच होगी कि सरकारी नौकरी उन्हें ज्यादा सुरक्षित करेगी।
यह भीड़ संकेत है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सरकारी नौकरी चाहिए। उत्तर भारत के राज्यों के आंकड़ों को अगर देखें, तो बेरोजगारी दर उतनी ज्यादा नहीं है, लेकिन जब सरकारी नौकरी मांगने वाले कहीं उमड़ते हैं, तो स्थिति भयावह नजर आने लगती है। ऐसा नहीं है कि केवल उत्तर भारत में सरकारी नौकरी के लिए भीड़ लग रही है। याद कीजिए, जुलाई के महीने में ही मुंबई एयरपोर्ट पर भगदड़ की स्थिति बन गई थी। एयरपोर्ट लोडर के 2,216 पद थे और जिसके लिए 25,000 से भी ज्यादा युवा उमड़ आए थे। धक्का-मुक्की ऐसी हुई थी कि एअर इंडिया के अधिकारियों को भी किसी हादसे की चिंता सताने लगी थी। उच्च नियुक्ति प्रक्रिया में भी अनेक राज्यों के नौजवान शामिल हुए थे। अतः बेरोजगारी की समस्या या अच्छी नौकरी की खोज हर राज्य के लिए चिंतन-मनन का विषय है, पर क्या राज्य सरकारें इस समस्या को पूरी गंभीरता से समझ रही हैं? राज्य सरकारों ने निजी क्षेत्र की नौकरियों को आकर्षक बनाने के लिए क्या किया है? रोजगार सुरक्षा में असमानता को दूर करने के लिए कितने प्रयास किए जा रहे हैं? समाज में असंख्य लोगों को यह क्यों लगता है कि सरकारी नौकरी ही असली नौकरी है। अगर निजी क्षेत्रों में नौकरियों को आकर्षक और सुरक्षित बनाया जाए, तो शायद सरकारी नौकरी के लिए होने बाली मारामारी कम होगी।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि सरकारें नौकरी नहीं दे रही हैं। नियुक्तियों का सिलसिला किसी भी साल एका नहीं है, लेकिन जितनी नियुक्तियां होनी चाहिए, उतनी नहीं हो रही हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में खाली पों को प्राथमिकता के साथ भरना चाहिए, ताकि लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो। पुलिस की अगर बात करें, तो यहां देश भर में करीब नौ लाख नियुक्तियां हो सकती हैं। कानून व्यवस्था की चुनौती से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल होना ही चाहिए। इसमें क्या दोराय है कि जब उत्तर प्रदेश में 80,000 से ज्यादा नए कांस्टेबल सेवा में तैनात होंगे, तो यहां कानून-व्यवस्था की स्थिति और अच्छी होगी। इससे मंदेश के प्रति आकर्षण बढ़ेगा। यहां पूंजी या निवेश में भी वृद्धि होगी, जिससे रोजगार बढ़ेगा। वास्तव में, बच्छी सरकारी नौकरियां दूसरी तमाम नौकरियों के लिए संभावना बढ़ाती है और शायद हर राज्य में यही करने की जरूरत है। अगर ऐसा किया गया, तो नौकरी मांगने बालों की भीड़ धीरे-धीरे घंटती चली जाएगी।
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