क्रोध की अग्नि में गुणों का विनाश

संपादकीय-

*क्रोध की अग्नि में गुणों का विनाश* 
   
क्रोध की अग्नि में मनुष्य के गुण भस्म हो जाते हैं। क्रोध में मनुष्य द्वारा कहे गए शब्द बहुत ही जहरीले होते हैं। जहरीले शब्द जब काटते हैं तो घाव भी गहरे होते हैं। इसलिए हमें समझना चाहिए कि जन्म और मृत्यु हमारे हाथों में नहीं है, परन्तु मधुर व्यवहार व अच्छे कर्म करना तो हमारे हाथ में है क्योंकि "इंसान अपने गुणों से ही महान बनता है, ऊँचे पदों से नहीं ।" व्यक्ति तब बुरा बनता है,  जब वो अपने परिवार व समाज को तिरस्कृत कर अहंकार में अपने आप को सबसे अच्छा व बड़ा समझने लगता है। अहंकार  हमेशा क्रोध को जन्म देता है जो विनाश की जड़ है ।
        जबकि क्रोध में बोला हुआ केवल एक कठोर शब्द इतना जहरीला होता है कि आपकी हज़ार प्यारी बातों को एक ही क्षण में नष्ट कर सकता है। संसार में इंसान ही एकमात्र ऐसा प्राणी है, जिसका जहर उसके दांतों में नहीं बल्कि बातों में है। मनुष्य की मानवता तो उसी क्षण नष्ट हो जाती है, जब उसे दूसरों के दुःख में भी हँसी आने लगती है। ऐसे आचरण के विरुद्ध मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
सही मायने में इंसान की महानता उसके गुणों में निहित है, न कि ऊंचे पदों पर। यह एक सर्वमान्य सत्य है जिसे हम अक्सर भूल जाते हैं। जब हम अपने परिवार और समाज को तिरस्कृत कर अहंकार में अपने आप को सबसे अच्छा और बड़ा समझने लगते हैं, तभी हम बुरे बनते हैं। अहंकार क्रोध को जन्म देता है, जो विनाश की जड़ है।
क्रोध में बोला हुआ एक कठोर शब्द इतना जहरीला होता है कि आपकी हजार प्यारी बातों को एक ही क्षण में नष्ट कर सकता है। संसार में इंसान ही एकमात्र ऐसा प्राणी है, जिसका जहर उसके दांतों में नहीं बल्कि बातों में है। मनुष्य की मानवता तो उसी क्षण नष्ट हो जाती है, जब उसे दूसरों के दुःख में भी हंसी आने लगती है।
हमें अपने गुणों को विकसित करना चाहिए, जैसे कि दया, करुणा, और सहानुभूति। इन गुणों के साथ, हम एक बेहतर इंसान बन सकते हैं और समाज में एक सकारात्मक योगदान कर सकते हैं। हमें क्रोध और अहंकार से दूर रहना चाहिए और अपने जीवन को गुणों की महानता से भरना चाहिए।
गुणों की महानता हमें निम्नलिखित तरीकों से मदद कर सकती है:
- हमें दूसरों के प्रति सहानुभूति और करुणा की भावना विकसित करने में मदद करती है।
- हमें अपने क्रोध और अहंकार को नियंत्रित करने में मदद करती है।
- हमें अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करती है।
- हमें समाज में एक अच्छा और सम्मानित नागरिक बनने में मदद करती है।
इसलिए, हमें अपने गुणों को विकसित करना चाहिए और क्रोध और अहंकार से दूर रहना चाहिए। तभी हम एक बेहतर इंसान बन सकते हैं और समाज में एक सकारात्मक योगदान कर सकते हैं।

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