*इंसान की असली पहचान: व्यवहार और मधुर वाणी*

*इंसान की असली पहचान: व्यवहार और मधुर वाणी* 
 
उच्च शिक्षा और अच्छे संस्कार जब धरे के धरे रह जाते हैं जब कोई व्यक्ति अपने नकारात्मक व्यवहार और कटु वाणी से जहरीले शब्दों को उंडेल कर किसी दूसरे व्यक्ति को क्षति पहुंच कर अवसाद पैदा करते हैं। मन बड़ा उद्वेलित हो उठता है, ऐसी स्थिति में शिक्षा में खर्च किया गया धन और संस्कारों को पाने के लिए व्यर्थ लुटाया गया समय व्यक्ति को पश्चाताप की अग्नि में धकेलने को मजबूत करता है। व्यक्ति का व्यवहार उसकी वाणी से उत्पन्न शब्दों की तरंग पर निर्भर करता है और वाणी के सुरीली शब्दों की भाव प्रवणता की प्रकाष्ठा क्या कहती है जरा सुनिए। कबीर ने वाणी पर संयम रखने के संदर्भ में बहुत ही खूबसूरत दोहे की इन पंक्तियों में जो ज्ञान समेट कर रख दिया। वह आज के विषय की प्रासंगिकता को इंगित करता है। 

"ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोए, ओरण को शीतल करें आपहु  शीतल हो।।"

अर्थात कबीर दास में वाणी के मधुर शब्दों की मधुर खेती के संदर्भ में कहा है ऐसी ऐसे शब्द बोलिए जिससे आपके व्यवहार में बदलाव कर दे जीवन जीने के तरीके की यह सबसे बड़ी जमापूंजी होगी। व्यक्ति दौलत के पीछे भागता है। दौलत से दुनिया के संसाधनों को इकट्ठा करके रंगीन महल बनता है। जीवन भर बड़ा देखने की होड़ में दुखों के कारण का स्वयं हिस्सा बनकर संघर्ष करता रहता है। हमें मधुर चाहिए अपनी मधुर वाणी से लोगों को आकर्षित कर अच्छे लोगों से अच्छे संबंध बनाए रखना चाहिए। हो सकता है आपके पास एक समय विशेष के लिए पैसा ना हो लेकिन आपकी मधुर वाणी के संबंध आपको इस समस्या से नहीं जूझने देंगे। व्यक्ति अपने नाम की पहचान के लिए बड़ी शिद्दत से परिश्रम करता है। जिस व्यक्ति ने अपने नाम की पहचान कायम करने के लिए परिश्रम की है। वह व्यक्ति इतिहास के शिखर सूची में अपना नाम दर्ज कर चुका है। हमें जीवन जीने की कला में स्वयं के नाम की पहचान काम करने के लिए संघर्ष के रही बना ही होगा। मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
व्यक्ति की पहचान क्या है? यह सवाल हमेशा से हमारे मन में उठता आया है। क्या यह उसकी कद काठी और अच्छे पहनावे से होती है? नहीं, बल्कि यह उसके अपने व्यवहार से होती है और उसमें भी मधुर वाणी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

वेश भूषा, कद काठी और अच्छा पहनावा तो एक बाहरी पहचान है, जो मस्तिष्क में अंकित हो जाती है। लेकिन मधुर वाणी और व्यवहार से बनी पहचान अमिट हो जाती है, क्योंकि यह ह्रदय और मन में अंकित होती है। यह पहचान व्यक्ति के वास्तविक स्वरूप को दर्शाती है और लोगों के मन में उसकी छाप छोड़ती है।
व्यक्ति का आकार, रंग रूप, समय यह सब परिस्थितियों के साथ बदल जाता है। उसे पहचानना मुश्किल हो जाता है, लेकिन मधुर वाणी और व्यवहार से बनने वाली पहचान व्यक्ति की असली पहचान के रूप में मन में स्थिर होती है और इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलती है। यह पहचान व्यक्ति को समाज में एक विशेष स्थान दिलाती है और उसकी इज्जत बढ़ाती है।
इसलिए, अच्छे कपड़े और चेहरे की तरह अपनी पहचान में सुधारकर संवारना ही हितकारी है। हमें अपने व्यवहार और मधुर वाणी पर ध्यान देना चाहिए, ताकि हमारी असली पहचान बन सके। हमें अपने शब्दों और कार्यों से दूसरों को प्रेरित करना चाहिए और समाज में एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

अपनी पहचान को मधुर वाणी और व्यवहार से बनाएं, क्योंकि यही आपकी असली पहचान है।
अपने व्यवहार और शब्दों से दूसरों को प्रेरित करें।
समाज में एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करें।
अपनी पहचान को संवारकर अपने जीवन को सफल बनाने में मधुर वाणी और संयमित व्यवहार की दौलत के बदौलत व्यक्ति शिखर पुरुष की सूची में अपना नाम दर्ज कर सकता है बशर्ते व्यक्ति की प्रबल इच्छा शक्ति हो और इस इच्छा शक्ति के बल पर सब कार्य संभव है।

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