विश्वास की सांस - रिश्तों की जीवनरेखा

संपादकीय: 15 नवंबर 2024

 विश्वास की सांस - रिश्तों की जीवनरेखा
जीवन में सांस और विश्वास दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। सांस के बिना जिस्म जीवित नहीं रह सकता, उसी तरह विश्वास के बिना रिश्ते भी जीवित नहीं रह सकते। आजकल त्योहार फीके नहीं हुए हैं, बल्कि व्यवहार फीके हो गए हैं। छोटी-छोटी बातों पर ताल्लुकात बिगड़ जाते हैं। हमें यह समझने की जरूरत है कि सही क्या है और सही कौन है, इस पर उलझने के बजाय हमें अपने रिश्तों में विश्वास और समझ को मजबूत बनाने की जरूरत है।
आज के समय में जब रिश्ते टूटने की खबरें आम हो गई हैं, तब हमें अपने रिश्तों को बचाने के लिए विश्वास, समझ और सहयोग की जरूरत है। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। विश्वास की महत्ता और रिश्तों को मजबूत बनाने के तरीकों पर केंद्रित है
   सांस और विश्वास दोनों अलग-अलग नाम है, लेकिन काम एक ही है।सांस जाए तो जिस्म खत्म हो जाता है और विश्वास जाए तो रिश्ता खत्म हो जाता है ! कुछ लोग आपस में बात कर रहे थे कि त्योहार अब फीके हो गए हैं, पास बैठे एक बुजुर्ग बोले, बेटा त्यौहार नहीं आजकल तो व्यवहार फीके हो गए हैं । यूंँ ही छोटी छोटी बातों पर ताल्लुकात बिगड़ जाते हैं।
       मुद्दा होता है "सही क्या है" और हममें से "सही कौन" है, इस पर उलझ जाते हैं। बाकी आप हमेशा याद रखना, हर चीज उम्मीद से शुरू होती है और सबक पर खत्म होती है।
जीवन की सच्चाई यह है कि हमारी अच्छाइयां बेशक अदृश्य हो सकती हैं, लेकिन इनकी छाप दूसरों के हृदय में हमेशा विराजमान रहती है। हमारा दृष्टिकोण ही हमारे जीवन को परिभाषित करता है। जीवन उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है, जो इसका भरपूर आनंद ले रहे हैं, जबकि यह उन लोगों के लिए मुश्किल है, जो इसका विश्लेषण कर रहे हैं और उन लोगों के लिए सबसे खराब है, जो अंधविश्वास, पाखंडवाद, द्वेष भावना, घृणा व नुक्ताचीनी आदि कुरुतियों में फंसकर इसकी आलोचना कर रहे हैं।

हमारी अच्छाइयां अदृश्य हो सकती हैं, लेकिन इनकी छाप दूसरों के हृदय में जीवन भर विराजमान रहती है। महापुरुषों का कहना है कि समय हमें अपने साथ कुछ भी नहीं ले जाने देता, लेकिन समय अंतिम सांस लेने से पूर्व कुछ न कुछ छोड़कर जाने का पूरा-पूरा मौका देता है। इसलिए, हमें जीवन में अच्छाइयों को फैलाने का प्रयास करना चाहिए, ताकि हमारी अदृश्य अच्छाइयों की छाप दूसरों के हृदय में हमेशा विराजमान रहे।
आइए हम जीवन की सच्चाई को समझें और अच्छाइयों को फैलाने का प्रयास करें। हमारा दृष्टिकोण ही हमारे जीवन को परिभाषित करता है। जीवन की सच्चाई को समझने से हम अपने जीवन को सकारात्मक और सार्थक बना सकते हैं।

Comments

Popular posts from this blog

संवैधानिक इस्तीफा या मजबूरी का मंथन – उपराष्ट्रपति धनखड़ का कदम और लोकतंत्र की गूंज

"भोजन की थाली में हमारी सभ्यता का आईना"

पचेरी की बहू नीलम सोनी ने अंग्रेजी विषय में किया नेट जेआरएफ क्वालिफाइड।