सम्मान देने वाले बनने की भावना रखें
संपादकीय 25 नवंबर 2024
*सम्मान देने वाले बनने की भावना रखें*
सदैव हमें यह याद रखना चाहिए कि सम्मान पाने की लालसा रखने वाले नहीं, बल्कि सम्मान देने वाले बनने की भावना रखनी चाहिए। यह भावना हमें सहजता और सहनशीलता की ओर ले जाती है, जो मानव जीवन की सबसे बड़ी सामर्थ्य है।
सम्मान प्राप्ति की लालसा रखने वाले लोग अक्सर दूसरों को झुकाने की कोशिश करते हैं, लेकिन सम्मान देने वाले बनने की भावना रखने वाले लोग स्वयं को झुकाने की कोशिश करते हैं। यही सही अर्थ में सामर्थ्य है। मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
सहजता ही समर्थता है, सहनशीलता ही मानव जीवन की सबसे बड़ी सामर्थ्य है। सामर्थ्य का अर्थ यह नहीं कि आप दूसरों को कितना झुका सकते हो अपितु यह है कि आप स्वयं कितना झुक सकते हो क्योंकि जहाँ समर्थता होती है, वहाँ प्रायः विनम्रता का अभाव ही देखा जाता है। सामर्थ्य आते ही व्यक्ति के भीतर सम्मान प्राप्ति का भाव भी जागृत हो जाता है।
इसलिए सदैव इस बात के लिए प्रयासरत रहें कि हम सम्मान पाने की लालसा रखने वाले नहीं, सम्मान देने वाले बनने की भावना रखें । बाकी:- काम होने के बाद सम्मान तो दूर की बात है, स्वार्थ के वशीभूत वर्तमान में लोग काम सिद्ध कराने वाले व्यक्ति को ही भूल जाते हैं।
सम्मान प्राप्ति की लालसा रखने वाले लोग अक्सर स्वार्थ के वशीभूत होते हैं और काम सिद्ध कराने वाले व्यक्ति को भूल जाते हैं। लेकिन सम्मान देने वाले बनने की भावना रखने वाले लोग दूसरों की मदद करने और उनका सम्मान करने में खुशी महसूस करते हैं।
उदाहरण के लिए, एक अध्यापक अपने छात्रों को सिर्फ सम्मान प्राप्ति के लिए पढ़ाता है, तो वह उनकी मदद करने में कम रुचि रखता है। लेकिन एक अध्यापक जो सम्मान देने वाले बनने की भावना रखता है, वह अपने छात्रों की मदद करने में खुशी महसूस करता है और उनका सम्मान करता है।
इसलिए, आइए हम सम्मान पाने की लालसा रखने वाले नहीं, बल्कि सम्मान देने वाले बनने की भावना रखें और दूसरों की मदद करने में खुशी महसूस करें।
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