मन पर नियंत्रण: जीवन की सच्ची विजय

संपादकीय@हरेश पंवार।


*मन पर नियंत्रण: जीवन की सच्ची विजय* 

"मन के मत न चाहिए, 
मन चंचल चित चोर,
 निहारता हूं तुम्हें, 
नजर आती है कहीं और।"
अर्थात मन की चंचलता के साथ जो चित अर्थात ध्यान है वह कहीं और चला जाता है, या भटकता है। उह मन पर नियंत्रण करने की कला ही सही मायने में जीवन जीने की कला है। मन पर नियंत्रण कर पाना जीवन की सार्थकता है। अर्थात यह कहे कि जीवन की सच्ची विजय मन पर नियंत्रण करना ही है। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। 

         जिस सच को सही समय पर बताया ना जाए, वह झूठ बन जाता है। कहते है कि दुनिया रंग बिरंगी है । कभी हम किसी को अपने रंग में रंग लेते हैं, तो कभी दुनिया हमें अपने रंग में रंग लेती है अर्थात एक दूसरे के प्रभाव से हम सभी प्रभावित होते रहते हैं ।
    यदि गहनता से गौर करें तो यह सब मन का ही खेल होता है, मन को हम जिस दिशा की ओर जितनी ढ़ील देते हैं, मन उसी तरफ और उतना ही बहना शुरू हो जाता है । अतः मन पर नियंत्रण ही जीवन की सच्ची विजय है। बड़े बुजुर्गो का कहना है कि किसी के साथ सुख में बैठना तो बहुत आसान है, परन्तु दुख की घड़ी में खड़े रहना बहुत ही कठिन है ।

जीवन में सफलता और विजय की परिभाषा अक्सर हमारे द्वारा प्राप्त किए गए लक्ष्यों और उपलब्धियों से जुड़ी होती है। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि जीवन की सच्ची विजय क्या है? क्या यह सिर्फ बाहरी उपलब्धियों से जुड़ी हुई है, या इसका कुछ और भी अर्थ है?

इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने के लिए, हमें अपने मन की गहराइयों में उतरना होगा। मन हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और इसका नियंत्रण हमारे जीवन की दिशा को निर्धारित करता है।

जैसा कि कहा गया है, "जिस सच को सही समय पर बताया ना जाए, वह झूठ बन जाता है।" यह वाक्य हमें यह समझने के लिए प्रेरित करता है कि हमारे मन की बातें और हमारे कार्यों का संबंध कितना गहरा है।

मन पर नियंत्रण रखना जीवन की सच्ची विजय है। जब हम अपने मन को नियंत्रित करते हैं, तो हम अपने जीवन को भी नियंत्रित कर सकते हैं। हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं, अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं, और अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं।

लेकिन मन पर नियंत्रण रखना आसान नहीं है। यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें हमें अपने मन की बातों को सुनना, समझना, और नियंत्रित करना होता है। यह एक कठिन काम है, लेकिन यह जीवन की सच्ची विजय की कुंजी है।

बड़े बुजुर्गों का कहना है कि किसी के साथ सुख में बैठना तो बहुत आसान है, परन्तु दुख की घड़ी में खड़े रहना बहुत ही कठिन है। यह वाक्य हमें यह समझने के लिए प्रेरित करता है कि जीवन में सुख और दुख दोनों ही आते हैं, और हमें दोनों ही स्थितियों में खड़े रहने की क्षमता रखनी होती है।

इसलिए, आइए हम मन पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें। आइए हम अपने मन की बातों को सुनें, समझें, और नियंत्रित करें। आइए हम अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाएं, और जीवन की सच्ची विजय को प्राप्त करें।

Comments

Popular posts from this blog

संवैधानिक इस्तीफा या मजबूरी का मंथन – उपराष्ट्रपति धनखड़ का कदम और लोकतंत्र की गूंज

"भोजन की थाली में हमारी सभ्यता का आईना"

पचेरी की बहू नीलम सोनी ने अंग्रेजी विषय में किया नेट जेआरएफ क्वालिफाइड।