रिश्तों की पहली शर्त - सम्मान
संपादकीय:@ हरेश पंवार
16 दिसंबर 2014
*रिश्तों की पहली शर्त - सम्मान*
घटना का मैं जिक्र कर रहा हूं एक बार एक पति पत्नी आपस में झगड़ रहे थे। पत्नी का गुस्सा सातवें आसमान को पार कर रहा था। गुस्से के वसीबत होकर पत्नी अनाप-शनाप कहे जा रही थी। लेकिन पति चुप था। पत्नी सारी हदें पार करने लगी तो पति ने धीरे से कहा कि आप इतनी खूबसूरत हो तो इसका मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी कहती रहोगी। पति द्वारा पत्नी की तारीफ करने मात्र से ही पत्नी का गुस्सा शांत हो गया और पलक झपकते ही व्यवहार में परिवर्तन और वह प्रायश्चित की अग्नि में जलने लगी। जिस भाव से पत्नी शाब्दिक आक्रमण कर रही थी। उसका रुख बदलते ही देर नहीं लगी, और पत्नी ने कहा कि बहुत हो गया अब चलो चाय पीते हैं साथ-साथ। यहां जो गुस्से का प्रारूप बदलने में जो कारण बना वह सम्मान की भावना ही था ।पति द्वारा पत्नी के सम्मान में कह गए शब्दों ने सारी स्थिति बदल दी इसलिए यह समझा जा सकता है कि जीवन में रिश्ते बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। ये रिश्ते हमारे जीवन को सुखद और अर्थपूर्ण बनाते हैं। लेकिन रिश्तों को निभाने के लिए कुछ शर्तें होती हैं, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण शर्त है सम्मान।
उत्साह और जिजीविषा जीवन को जीने का पावर हाउस है। जो व्यक्ति जीवन में उत्साह और जिजीविषा के साथ चलता है, वह जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होता है। लेकिन जब हमारे रिश्तों में सम्मान नहीं होता है, तो हमारा उत्साह और जिजीविषा भी कम हो जाता है। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
रिश्तों की पहली शर्त सम्मान है और जो आपको सम्मान नहीं दे सकता वो रिश्ता नहीं निभा सकता।
उत्साह आपके जीवन का पावर हाउस है। जिंदगी में जीत बस उसकी होती है, जो सब कुछ हार कर भी हार नहीं मानता। कितनी खूबसूरत सी हो जाती है उस वक्त दुनिया ! जब हमारा अपना कोई कहता है कि तुम याद आ रहें हो...।
शायद इसीलिए कहते हैं जीवन में बड़ों का आर्शीवाद भी उतना ही जरूरी है जितना एक पौधे को पनपने के लिए पानी, क्योंकि रिश्ते की पहली शर्त सम्मान है... जो आपको सम्मान नहीं दे सकता वो रिश्ता नहीं निभा सकता बाकी तकलीफ तो भुलाई जा सकती है, मगर जानबूझकर तकलीफ देने वालों को नहीं ।
रिश्तों में सम्मान का मतलब है कि हम एक दूसरे की भावनाओं और जरूरतों का सम्मान करते हैं। जब हमारे रिश्तों में सम्मान होता है, तो हम एक दूसरे के साथ खुश और संतुष्ट रहते हैं। लेकिन जब सम्मान नहीं होता है, तो रिश्ते टूटने लगते हैं।
एक उदाहरण के रूप में, यदि एक पति-पत्नी के रिश्ते में सम्मान नहीं है, तो उनके रिश्ते में तनाव और संघर्ष हो सकता है। लेकिन यदि वे एक दूसरे का सम्मान करते हैं, तो उनके रिश्ते में प्यार और सौहार्द हो सकता है।
इसलिए, रिश्तों में सम्मान बहुत महत्वपूर्ण है। जब हम एक दूसरे का सम्मान करते हैं, तो हमारे रिश्ते मजबूत और सुखद हो सकते हैं। जीवन में बड़ों का आर्शीवाद भी उतना ही जरूरी है जितना एक पौधे को पनपने के लिए पानी। इसलिए, हमें अपने रिश्तों में सम्मान को बढ़ावा देना चाहिए और एक दूसरे की भावनाओं और जरूरतों का सम्मान करना चाहिए।
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