विवादों का हल वार्ता से संभव है

संपादकीय:@एडवोकेट हरेश पंवार।

 *विवादों का हल वार्ता से संभव है* 
विवाद की स्थिति में अक्सर हम हिंसा का रास्ता अपनाते हैं, लेकिन यह समस्या का हल नहीं है। हिंसा से समस्या और भी जटिल हो जाती है। जबकि अहिंसा सभी समस्याओं का हल है, क्योंकि लोगों के मन के भीतर प्रेम का बीज होता है, घृणा का फल नहीं। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
विवाद के कारणों को देखा जाए तो मुख्य कारण उन में संवाद का अभाव ही है। दूरियों के कारण से घृणा के बीच अंकुरित हो जाते हैं। इसलिए विवाद की स्थिति में आमने सामने बैठ कर वार्ता करने से एक दूसरे का मन का मैल धुल जाता है ।   
हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है, जबकि अहिंसा सभी समस्याओं का हल है क्योंकि लोगों के मन के भीतर प्रेम का बीज होता है, घृणा का फल नहीं । यदि सावधानी से सद्व्यवहार का धैर्यपूर्वक पालन किया जाए तो विवाद की स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती ।
     यहां यह भी गौर का विषय है कि किसी भी विवाद के उत्पन्न होने की स्थिति में शांति के लिए हमेशा वार्ता से हल निकालने की एक राह शेष रहती है क्योंकि आमने सामने बैठ कर वार्ता करने से एक दूसरे के मन का मैल धुल जाता है और संवेदनहीनता से मानवता का मार्ग अवरूद्ध ही होता है।

एक उदाहरण के रूप में, दो पड़ोसी अपनी जमीन के बारे में विवाद में उलझे हुए थे। दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ मामला दर्ज कराया और अदालत में लड़ने लगे। लेकिन अदालत के बाहर दोनों पक्षों ने आमने सामने बैठ कर वार्ता की और अपने मतभेदों को दूर कर लिया।

इससे हमें यह सीखने को मिलता है कि विवाद की स्थिति में हमें हिंसा का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए, बल्कि आमने सामने बैठ कर वार्ता करनी चाहिए। इससे एक दूसरे के मन का मैल धुल जाता है और संवेदनहीनता से मानवता का मार्ग अवरूद्ध ही होता है।

यदि सावधानी से सद्व्यवहार का धैर्यपूर्वक पालन किया जाए तो विवाद की स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। इसलिए, हमें अपने जीवन में सद्व्यवहार और धैर्य का पालन करना चाहिए और विवाद की स्थिति में आमने सामने बैठ कर वार्ता करनी चाहिए।

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