अंबेडकर को लेकर गृहमंत्री के पेट में दर्द क्यों?

संपादकीय@एडवोकेट हरेश पंवार 
दिनांक 22दिसम्बर2024

*अंबेडकर को लेकर गृहमंत्री के पेट में दर्द क्यों?* 

खैर, खासी, खुशी, बैर, प्रीत, मदपान। 
ये छुपाए, न छुपे, जानत सकल जहान।। 

जैसा भाव मन के अंदर पलवित होता है। वैसी भाव मुद्राएं अंकुरित होकर अक्सर चेहरे पर उभर कर सामने आ ही जाती है। सालों साल से अंबेडकर विचारधारा से बौखलाई बैठे भाजपा पौषित अमित शाह के पेट में ऐसे दर्द उठा कि वे अपनी जुबान से ज़हर ही उगलने लगे। और उनके अंदर की सारी गंदगी उनकी जुबान पर देखी गई ।
अंबेडकर को लेकर देश की संसद में गृहमंत्री अमित शाह ने जो शर्मनाक टिप्पणी करते हुए उनकी जो बौखलाहट देखने को मिली। ऐसी स्थिति में मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।

 अंबेडकर  देश की भावनाओं का दर्पण है। जिनके प्रति श्रद्धा के भाव है। आज अंबेडकर घट-घट के वासी हैं। हर-घर अंबेडकर है। आस्था और विश्वास के प्रतीक अंबेडकर हैं। गरीबों के मसीहा, दलितों के दातार और नारी मुक्ति के दाता हैं  अंबेडकर,मानवता के इफाजक ओर तो ओर,अंधों की आंख, गुगों की जुबान, बहरों के कान, और भारत के संविधान है अंबेडकर। और सच कहें तो प्रथम पूज्य है अंबेडकर लोग अपने घरों में ,अपने दफ्तरों में, पूजा घर में श्रद्धा और विश्वास के हर कोने में है  अंबेडकर।यहां तक शादी विवाह के कार्ड के प्रथम अक्ष में आस्था और विश्वास के साथ अंबेडकर की तस्वीर लगाने की परंपरा बन चुके हैं । लोगों की भावनाओं को जो ठेस पहुंची है। उसका अंदाज नहीं लगाया जा सकता लेकिन अमित शाह शायद ये भूल गए हो। जो टिप्पणी वे कर रहे हैं कि आजकल फैशन चल गया है अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर और जिस लहजे से वे कहते नजर आए हैं। वास्तव में उनकी अंदरूनी टसल का दर्द झलक रहा था। और वे कह रहे थे कि इतना नाम भगवान के लेते थे तो सात जन्मों तक उनको स्वर्ग मिल जाता, भगवान के नाम पर आपने कितने अपकृत्य कर डाले कम से कम आप ही  स्वर्गवासी हो जाते। अरे भले मानस जो स्वर्ग नर्क की गाथा कहते थे और भगवान का नाम रटने वाले भगवाधारी भी अब मठों की गद्दी छोड़ कर अंबेडकर की अंगुली के इशारे पर संसद में चले आए हैं। सात जन्मों का भला चाहने वाले बेसुरे लोगों जनता सब जानती है कि आपने संसद में रहते हुए साथ पीढ़ियो का बंदोबस्त कर लिया। सही मायने में भला यह साधु सन्यासी भी जानते हैं कि स्वर्ग नर्क भी यही है तो फिर आप यह कोरी कल्पना करके दुखी हो रही है। देश की जरूरत और वर्तमान समय के भगवान भी अंबेडकर हैं। क्योंकि अंबेडकर एक दर्शन है। जिसे समझने वाला हर व्यक्ति प्रशन्न है। अंबेडकर हर रोग की दवा है, हर मर्ज की दुआ है। जिसे पाने वाला हर व्यक्ति उन पर फिदा है। अंबेडकर मानवतावादी विचार है। अंबेडकर हर समस्या का निदान है। भारत का संविधान है। और इस देश के साक्षात भगवान है। दलित, उपेक्षित व वंचितों का अभिमान है अंबेडकर। अंबेडकर एक खरपतवार नाशक दवा है। जहां-जहां अंबेडकरवाद  है। वहां वहां पाखंडवाद का पूर्णतया खात्मा है। अंबेडकर फैशन नहीं एक्शन है। अंबेडकर हर बीमारी का इलाज है। 
लेकिन जिन जिनको अंबेडकर को लेकर एलर्जी है। उनके पेट में दर्द जरूर है। और यह दर्द अंबेडकर को पढ़े व समझे बिना ठीक हो नहीं सकता लेकिन समस्या यह है जिनके पेट में दर्द है। उनको अंबेडकर को लेकर के बड़ी एलर्जी है। यह अंबेडकर रूपी दवा खा नहीं सकते और उनके पेट में दर्द ठीक हो नहीं सकता। अंबेडकर एक ऐसी कूनीन की दवा है। जिसको खाने पर मुंह कड़वा होता है लेकिन खाने के बाद इलाज भी तुरंत होता है। अंबेडकर की ज्ञान की पुड़िया खाएं बिना ठीक नहीं हो सकते और जिन-जिन के पेट में दर्द है उनको अंबेडकर से जरूर एलर्जी है। वे चिल्ला रहे हैं। सड़क से लेकर संसद तक चिल्ला रहे हैं। अंबेडकर की रामबाण वोट के अधिकार औषधि के चलते कुछ तो नकली व नमकहरामी दिखावे के चलते अंबेडकर नाम की नकली दवा खा रहे हैं। दिखावे में अंबेडकर अंबेडकर चिल्ला रहे हैं। अंदर के गहरे जख्मी घाव दिखा रहे हैं ऐसे रोगियों में देश के गृहमंत्री अमित शाह भी अंबेडकर नाम के बदहजमी रोग के असाध्य रोगी हैं।

  देश की सबसे बड़ी महापंचायत में गृहमंत्री अमित शाह के पेट में ऐसा दर्द उठा, व बौखलाहट के मारे अंबेडकर अंबेडकर कहत इसी हुए ऐसे जल उठे उनके पेट में छुपे अंदरूनी घाव ऐसे देखे कि अब वह मुंह छुपाते फिर रहा है।
   अमित शाह जानते हैं कि अब उनकी झूठ की दुकान की जड़ों को उखाड़ने के लिए अंबेडकर नाम ही काफी है और इसी से आहट होकर तल्ख टिप्पणी करते हुए अपनी दूषित मानसिकता का परिचय देते नजर आए।
   अमित शाह के अफलातूनी तानाशाही तंत्र की जड़ों को हिलाने के लिए अंबेडकरवाद एक मजबूत आधारशिला बची है देश में और ऐसा करके वे उसे अब डाइवर्ट करना चाहते हैं

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