रुपया सब कुछ तो नहीं, परन्तु बहुत कुछ है।

संपादकीय: _

भीम प्रज्ञा@एडवोकेट हरेश पंवार

14जनवरी 2025 ,श्रीमाधोपुर 


*रुपया सब कुछ तो नहीं, परन्तु बहुत कुछ है।*

यह तो आपने सुना होगा कि बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपया। आज दुनिया में रुपए की बड़ी महत्वता है जिसे नकारा नहीं जा सकता। रुपया सब कुछ तो नहीं होता लेकिन बहुत कुछ होता है। यह मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।

हमें अक्सर यह समझाया जाता है कि ईश्वर कई रूपों में बटा हुआ है। पंचतत्व तो है ही - पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ईश्वर का एक छठवां तत्व भी हो सकता है? और वह है रुपया।

धन के इस टुकड़े में कई चल-अचल संपत्तियां छुपी रहती हैं। आपके पास जो रुपया चलकर आया है, तो मानकर चलिए कि आपसे पहले यह पता नहीं किन किन हाथों से, कौन-कौन से मकसद पूरे करके लौटा होगा। हो सकता है, इससे शराब का भुगतान किया गया हो। कोई अपराध हुआ हो। फिर किसी साधु की झोली में गिरा हो।

अब आप उसका क्या उपयोग करेंगे। रुपया वही है, परंतु इस कागज़ के टुकड़े के पीछे कई गतिविधियां छिपी है। इसी तरह प्रकृति में ईश्वर है। सब अपने-अपने हिसाब से उपयोग करते हैं, ये हमारे ऊपर है कि नीयत हमारी कैसी है।

इसलिए, हमें रुपये का सही उपयोग करना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि रुपया सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन को बनाने या बिगाड़ने की शक्ति रखता है।

निष्कर्ष में, हमें रुपये का सही उपयोग करना चाहिए और इसके पीछे छिपी गतिविधियों को समझना चाहिए। हमें यह भी समझना चाहिए कि प्रकृति में ईश्वर है और हमें इसका सही उपयोग करना चाहिए।

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