क्रोध: एक आत्मघाती रोग

संपादकीय: 
16-01-2025
 *"क्रोध: एक आत्मघाती रोग"* 
क्रोध एक ऐसी भावना है जो हमारे जीवन को नष्ट कर सकती है। यह एक आत्मघाती रोग है जो हमें अपने आप पर नियंत्रण खोने का कारण बनता है। क्रोध के कारण हम अपने रिश्तों, अपने स्वास्थ्य और अपने जीवन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। 
क्रोध का सबसे अच्छा इलाज चुप (मौन) है। जब हम क्रोध में होते हैं, तो हमें अपने मुंह को बंद रखना चाहिए और अपने विचारों को शांत करना चाहिए। क्रोधी व्यक्ति का मुख खुला रहता है किन्तु नेत्र बंद रहते हैं। यह हमें यह याद दिलाता है कि क्रोध हमें अंधा बना देता है और हमें अपने आसपास की चीजों को सही तरीके से देखने नहीं देता। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहो कि बोलता है।

क्रोध समझदारी को घर से बाहर निकाल देता है और अंदर दरवाजे की चिटकनी लगा देता है। क्रोध का सबसे अच्छा इलाज चुप (मौन) है। क्रोधी व्यक्ति का मुख खुला रहता है किन्तु नेत्र बंद रहते हैं। क्रोध मूर्खता पर शुरू होता है और पश्चाताप पर खत्म होता है । सज्जन का क्रोध क्षण भर रहता है, साधारण आदमी का दो घंटे, मूर्ख आदमी का एक दिन व एक रात और महापापी का मरते दम तक रहता है ! क्रोध समुद्र की तरह बहरा है और आग की तरह उतावला हैं।
हम कीड़े मकोड़े और रेंगने वाले जन्तुओं को तो मार डालते हैं परन्तु अपने सीने में छिपे हुए क्रोध को नहीं मारते जो सचमुच में मारने की चीज है। जिस समय क्रोध उत्पन्न होने वाला हो उस समय उसके परिणामों पर विचार अवश्य करो। स्मरण रखिए कि आप क्रोध की दशा में ही अत्यंत निर्बल व क्षणीकाय रहते हैं। कारण यह है कि क्रोध का अस्त्र स्वयं चालक को घायल करता है। कुछ लोग कहते हैं कि जिस समय तुम्हें क्रोध आयें, उस समय एक गिलास भर के पानी पी लो। उफनता क्रोध शांत हो जाएगा या फिर आप उस स्थान को छोड़ दीजिए और चले जाइए । बलवान को जल्दी क्रोध नहीं आता, क्रोध तो मूर्खों को आता है, ज्ञानियों को नहीं। क्रोध एक तरह का रोग है जिसे क्षणिक पागलपन ही कह सकते हैं।

क्रोध मूर्खता पर शुरू होता है और पश्चाताप पर खत्म होता है। जब हम क्रोध में होते हैं, तो हम अक्सर ऐसी चीजें कहते हैं और करते हैं जिनके लिए हम बाद में पछताते हैं। इसलिए, हमें अपने क्रोध को नियंत्रित करना सीखना चाहिए और अपने विचारों और कार्यों को सोच-समझकर करना चाहिए।

सज्जन का क्रोध क्षण भर रहता है, साधारण आदमी का दो घंटे, मूर्ख आदमी का एक दिन व एक रात और महापापी का मरते दम तक रहता है। यह हमें यह याद दिलाता है कि क्रोध की अवधि हमारी बुद्धिमत्ता और हमारे चरित्र पर निर्भर करती है।

क्रोध समुद्र की तरह बहरा है और आग की तरह उतावला है। यह हमें यह याद दिलाता है कि क्रोध हमें अपने आसपास की चीजों को सुनने और समझने नहीं देता और यह हमें अपने आप पर नियंत्रण खोने का कारण बनता है।

हम कीड़े मकोड़े और रेंगने वाले जन्तुओं को तो मार डालते हैं परन्तु अपने सीने में छिपे हुए क्रोध को नहीं मारते जो सचमुच में मारने की चीज है। यह हमें यह याद दिलाता है कि हमें अपने क्रोध को नियंत्रित करना सीखना चाहिए और इसे अपने जीवन से निकालना चाहिए।

जिस समय क्रोध उत्पन्न होने वाला हो उस समय उसके परिणामों पर विचार अवश्य करो। स्मरण रखिए कि आप क्रोध की दशा में ही अत्यंत निर्बल व क्षणीकाय रहते हैं। कारण यह है कि क्रोध का अस्त्र स्वयं चालक को घायल करता है।

कुछ लोग कहते हैं कि जिस समय तुम्हें क्रोध आयें, उस समय एक गिलास भर के पानी पी लो। उफनता क्रोध शांत हो जाएगा या फिर आप उस स्थान को छोड़ दीजिए और चले जाइए। यह हमें यह याद दिलाता है कि हमें अपने क्रोध को नियंत्रित करना सीखन

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