प्रेम, भरोसा और सही कर्म
संपादकीय:
29 जनवरी 2025
*"प्रेम, भरोसा और सही कर्म"*
प्रेम, भरोसा और सही कर्म जीवन के तीन महत्वपूर्ण पहलू हैं जो हमारे रिश्तों और समाज को मजबूत बनाते हैं। लेकिन अक्सर हम इन पहलुओं को भूल जाते हैं और अपने स्वार्थ और गलत निर्णयों के कारण अपने रिश्तों और समाज को कमजोर बना देते हैं। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगी कि बोलता है।
प्रेम का नाटक देखकर अनुसरण करने वाली पीढ़ी कई बार रिश्तो को शर्मसार करते हुए देखी जा सकती है। वास्तव में प्रेम को देखा जाए तो विश्वास की धरातल पर एक भरोसा है और जब भरोसा तोड़ते हैं तो विश्वास उठ जाता है ऐसी स्थिति में मूल्यांकन किया जाना चाहिए क्या हमारे द्वारा किया गया कृत्य कितना सही वह कितना गलत है।
प्रेम वो नहीं होता जो एक ग़लती पर साथ छोड़ दे, बल्कि प्रेम तो वो होता है जो सौ गलतियों को भी सुधार कर साथ दे। यही वजह है कि हमें अपने रिश्तों में प्रेम और समझदारी को महत्व देना चाहिए। अगर कोई आप पर आंख बंद करके भरोसा करें तो आप उसका भरोसा तोड़कर उसे ये एहसास कभी मत दिलाओ कि वो अंधा है।
सिर्फ धोखा देना ही धोखा नहीं होता बल्कि किसी के साथ अपनेपन का नाटक करना उससे भी बड़ा धोखा होता है। इसलिए, हमें अपने रिश्तों में सच्चाई और ईमानदारी को महत्व देना चाहिए। बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि पहली बार मिला हुआ धोखा एक चेतावनी है, दूसरी बार मिला हुआ धोखा एक सीख है, परंतु तीसरी बार मिला हुआ धोखा आपके ही ग़लत निर्णयों का परिणाम है।
इसलिए, हमें अपने जीवन में सही कर्म को महत्व देना चाहिए। सही कर्म वह नहीं है, जिसके परिणाम हमेशा सही हो, बल्कि सही कर्म वह है जिसका उद्देश्य कभी गलत ना हो। हमें अपने जीवन में प्रेम, भरोसा और सही कर्म को महत्व देना चाहिए ताकि हम अपने रिश्तों और समाज को मजबूत बना सकें।
Comments
Post a Comment