जीवन के फैसले और सच्चाई

संपादकीय: 
31 जनवरी 2025
"जीवन के फैसले और सच्चाई"
जीवन में फैसले लेना एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो हमारे जीवन को आकार देता है। लेकिन कई बार फैसले लेना मुश्किल हो जाता है, और वहां हमें अटकने की बजाय आगे बढ़ना चाहिए। जीवन में कुछ फैसले बहुत सख्त होते हैं, और यही फैसले जीवन का रूख़ बदल देते हैं।

सच्चाई एक ऐसा मूल्य है जो हमें हमेशा अपनाना चाहिए। सच बोलने का साहस करना चाहिए, जिसका परिणाम सकारात्मक ही होगा। हमें बोलना कम और सुनना अधिक चाहिए, क्योंकि मुंह सिर्फ एक और कान दो हैं। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।

जीवन में कई बार हमें यह एहसास होता है कि जो दौड़ दौड़ कर भी नहीं मिलता, वहीं बिना दौड़े भी मिल जाता है। इसलिए, हमें जीवन में धैर्य और संयम रखना चाहिए।
जिंदगी में जब फैसला लेना मुश्किल हो जाए तो ऐसी स्थिति में अटकने की बजाए तो उस वाक़्यात को पेंडिंग रख कर आगे बढ़ जाना चाहिए क्योंकि फैसला अगर हमारे पक्ष में होता है तो हमें सोचने की जरूरत नहीं होती और मुश्किलात में कभी भी फैसला हमारे हक में नहीं होता । जिंदगी में कुछ फैसले बहुत सख्त होते हैं और यही फैसले जिंदगी का रूख़ बदल देते हैं।

याद रखें, मुंह सिर्फ एक और कान दो हैं, मतलब ये कि हमें बोलना कम और सुनना अधिक चाहिए। इसलिए सच बोलने का साहस कीजिये जिसका परिणाम सकारात्मक ही होगा । वैसे भी कई बार जो दौड़ दौड़ कर भी नहीं मिलता, वहीं बिना दौड़े भी मिल जाता है ! बाकी बहुत समय पड़ा है, यही बहम सबसे बड़ा है। किसी कवि की दो पंक्तियां याद आती है:- हजारों सबक पढ़ें, कुछ भी समझ नहीं पाया, अपनों ने फरेब क्या किया, दुनिया समझ में आ गयी।

जीवन के अनुभव हमें सिखाते हैं कि अपनों ने फरेब क्या किया, दुनिया समझ में आ गयी। इसलिए, हमें जीवन में सच्चाई और ईमानदारी को महत्व देना चाहिए।

Comments

Popular posts from this blog

संवैधानिक इस्तीफा या मजबूरी का मंथन – उपराष्ट्रपति धनखड़ का कदम और लोकतंत्र की गूंज

"भोजन की थाली में हमारी सभ्यता का आईना"

पचेरी की बहू नीलम सोनी ने अंग्रेजी विषय में किया नेट जेआरएफ क्वालिफाइड।