उदामांडी की बहू अनिता कुमारी ने हिन्दी मे 98.98 प्रतिशत अंक प्राप्त कर नेट जेआरएफ में रचा डाला इतिहास

दिनांक 28 फरवरी 2025@एडवोकेट हरेश पंवार। 

*उदामांडी की बहू अनिता कुमारी ने हिन्दी मे 98.98 प्रतिशत अंक प्राप्त कर नेट जेआरएफ में रचा डाला इतिहास* 
*अच्छा घर या अच्छा वर मिले तो नाम रोशन कर सकती हैं बेटियां* 

अनिता कुमारी के जज्बे के सफरनामें से उद्धरण- "नौ वीं में पढ़ते पढ़ते बड़ी बहन के साथ हो गई थी शादी, फिर ससुराल में खेती-बाड़ी व पशुपालन के काम धंधे के कारण छूट गई पढ़ाई, फिर पति का मिला मोटिवेशन तो घूंघट की ओट में  दुबारा पढ़ाई शुरू कर दसवीं पास कर साइंस में लिया दाखिला, 12 वीं में बेटे को जन्म दिया, फिर जापें में छुट्टी गई पढ़ाई, दो बच्चों के लालन पालन और गृह संचालन के बीच सेल्फ स्टडी कर बीएसटीसी व ग्रेजुएशन किया। पति की नौकरी लग गई तो बच्चों के लालन पालन और घर गृहस्ती के संभालने की जिम्मेदारी के चलते पढ़ाई पर नहीं दिया ध्यान,11 साल बाद फिर कोरोना काल में घर बैठे बैठे फिर पढ़ाई करने का जुनून सवार हुआ, हिंदी साहित्य से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। पहले व दूसरे चांस में नेट क्वालिफाइड हुई ,तीसरे चांस में 98.98 प्रतिशत अंक के साथ नेट जेआरएफ क्वालिफाइड कर रच डाला इतिहास। अब पीएचडी रिसर्च के दौरान 45000 रुपए प्रति महीना मिलेगा स्कॉलरशिप पारिश्रमिक।

 *भीम प्रज्ञा वूमेन सर्च स्टोरी।* 

बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर ने कहा कि- 'शिक्षा ऐसी शेरनी का दूध है जो पिएगा वह धाड़ेगा।' शिक्षा रूपी शेरनी का दूध जिसने पीना सीख लिया मानो उनका जीवन सफल हो गया। जिन बेटियों ने शिक्षा रूपी शेरनी का दूध पीकर अपनी हालातो  से लड़ी और वे स्वयं अपनी तकदीर का वारिस-नामा  लिखने में कामयाब हुई है। जो महिलाएं अपने जज्बातों की कहानी स्वयं लिख पाई हैं  सही मायने में वे ही आज बड़े मुकाम पर पहुंची है।
किसी ने सच कहा कि नारी को अच्छा घर मिले या फिर अच्छा वर मिले तो वह अपने जीवन की कायनात को बदल सकती है। इसलिए मन लगाकर अच्छी पढ़ाई करना बहुत जरूरी है लेकिन कई बार विषम परिस्थितियों से व्यवधान आ भी जाए तो इच्छाशक्ति के बल पर असंभव को संभव करके अपने मार्ग प्रशस्त कर सकती है। ऐसे ही जज्बे की कहानी लिखने का काम किया है। बुहाना उपखंड के उदामांडी की बहू अनिता कुमारी ने विषम परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए अपनी पढ़ने की जिज्ञासों को जागृत कर घर गृहस्ती के सब काम धंधों को निपटाकर घूंघट की ओट में पढ़ाई कर अपने जज्बे की कहानी साबित कर दिखाई है जो हाल ही में  नेट जेआरएफ दिसंबर 2024 एग्जाम क्वालिफाइड कर एतिहासिक रिकॉर्ड कायम करते हुए 98.98 प्रतिशत अंक प्राप्त कर कीर्तिमान स्थापित किया है।
 अनीता ने भीम प्रज्ञा को बताया कि उनकी यह सफलता का सफर उनके जीवन साथी नरपत सिंह मेघवाल से विवाह के बाद अपनी पढ़ाई की जिज्ञासाओं को उनके समक्ष रखा तो उन्होंने पूरी अपॉर्चुनिटी के साथ मनोबल बढ़ाते हुए गांव परिवार की इच्छा शक्ति के बाहर जाकर पढ़ने का साहस रखा। अनीता ने अपनी पढ़ाई की बात अपने पीहर और ससुराल पक्ष वालों के समक्ष रखी तो सब ने इनकार कर दिया लेकिन पति ने विरोध झेलते हुए जब उन्हें साथ दिया तो वह घूंघट की ओट में ससुराल के स्कूल पढ़ने गई। बच्चे हो गए तो फिर पढ़ाई छूट गई लॉकडाउन में बच्चों के साथ घर बैठे बैठे ऑनलाइन मोटिवेशनल वीडियो देखना शुरू किया। ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम से जुड़कर फिर पढ़ाई शुरू करने का मानस बनाया और हिंदी साहित्य से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। अनिता कुमारी बताती है कि उनके पति नरपत सिंह मेघवाल ने नेट जेआरएफ का सिलेबस लाकर दिया और जुनून के साथ बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके साथ खुद किताब लेकर मोबाइल के गुगल गुरु से पढ़ना शुरू किया। 22 फरवरी 2025 को जब नेट जेआरएफ दिसंबर 2024 का परिणाम आया तो ऑल इंडिया यूजीसी क्वालिफाइड 98.98 प्रतिशत अंक के साथ हिंदी साहित्य में एतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज करवाया।
 सक्सेस वूमेन स्टोरी की हीरोइन अनिता कुमारी ने अपनी सफलता के सहयोग देने में उनकी सासूमां रोशनी देवी ससुर सीताराम, पति नरपत सिंह, दसवीं में पढ़ रहे बेटा सतीश कुमार व पांचवी में पढ़ रहे बेटा दीक्षांत कुमार सहित परिवार के अन्य सदस्य तथा पीहर पक्ष गोकुल का बास सूरजगढ़ से  मजदूर पिता बलवीर सिंह व गृहणी माता संतोष देवी के आशीर्वाद भरे योगदान को बताया। और अपनी सफलता का श्रेय देते हुए कहा कि जब पढ़ा तो  उन्हें पता चल कि यह अवसर उन्हें बाबा साहब डॉ अंबेडकर, के संवैधानिक योगदान और महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले जैसे महापुरुषों के सामाजिक योगदान की शिक्षाओं  के बदौलत उन्हें यह अवसर मिला।
अनिता कुमारी ने बताया कि आगे चलकर प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य बना चुकी है। न केवल कॉलेज प्रोफेसर की तैयारी करेगी बल्कि वह तो  अब आरएएस एग्जाम क्वालिफाइड करके प्रशासनिक अधिकारी बनकर  ही दम लेगी। भीम प्रज्ञा पाठक टीम की ओर से अनिता कुमारी को ढेर सारी शुभकामनाएं ताकि उनका साहस और जूजून बरकरार रहे। अपने सफलता की शिकार तक पहुंचकर घूंघट की ओट में प्रतिभा का दफन कर चुकी अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरक बन सके।

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