आधुनिकता में सुख की कमी
संपादकीय:
2 फरवरी 2025
"आधुनिकता में सुख की कमी"
आज का समाज विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रगति के कारण सुविधाओं से भरा पड़ा है। लेकिन इसके बावजूद, अधिकांश लोग मानसिक तनाव, दुखी, उदास, चिंतित और क्षुब्ध दिखाई देते हैं। इसका कारण वस्तुओं की कमी नहीं है, बल्कि जो कुछ उपलब्ध है, उसका सदुपयोग नहीं हो पाना है। मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
बुद्धिमत्ता का वास्तविक स्वरूप यही है कि जो कुछ हस्तगत है, उसका श्रेष्ठतम सदुपयोग किया जाए। लेकिन आज के समाज में लोग अपने स्वार्थ के कारण एक-दूसरे का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि आज के समाज में सुख की कमी है।
वर्तमान समय को प्रगति का युग कहा जाता है। इन दिनों ज्ञान और विज्ञान का असाधारण विस्तार हुआ है। इसके साथ ही सुविधाजनक साधनों की भी अतिसय वृद्धि हुई है। आज के युग में विज्ञानिक उपकरणों का उपयोग इतना बढ़ गया है कि इन उपकरणों के बिना हमें अपने जीवन में कमी का एहसास होता है।
विज्ञान की प्रगति के कारण ही आज हमारे पास आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं।
वहीं अतीत में इतने साधन नहीं थे, फिर भी लोग सुखपूर्वक रहते थे, लेकिन अब सुविधाओं का बाहुल्य होते हुए भी अधिकांशत: व्यक्ति मानसिक तनाव, दुखी, उदास, चिंतित और क्षुब्ध देखे जाते हैं। इसका कारण वस्तुओं की कमी नहीं, बल्कि जो कुछ उपलब्ध है, उसका सदुपयोग नहीं हो पाना है। बुद्धिमत्ता का वास्तविक स्वरूप यही है कि जो कुछ हस्तगत है, उसका श्रेष्ठतम सदुपयोग किया जाय। बाकी:- कोई नहीं किसी का, यहां सबको अपने अपने फायदे की लगी बीमारी है, स्वार्थ से चल रही ये दुनियां, सब मतलब की रिश्तेदारी है।
आज के समाज में लोगों को अपने स्वार्थ के अलावा कुछ और नहीं दिखाई देता है। वे अपने फायदे के लिए एक-दूसरे का उपयोग करते हैं और जब उनका फायदा पूरा हो जाता है, तो वे एक-दूसरे को छोड़ देते हैं। यही वजह है कि आज के समाज में रिश्ते कमजोर होते जा रहे हैं।
आज के समाज में सुख की कमी का एक और कारण है लोगों की अपेक्षाएं। लोगों को लगता है कि यदि वे अधिक से अधिक सुविधाएं प्राप्त करेंगे, तो वे सुखी हो जाएंगे। लेकिन यह सच नहीं है। सुख की कमी का कारण लोगों की अपेक्षाएं नहीं है, बल्कि उनकी अपेक्षाओं को पूरा न कर पाना है।
आज के समाज में सुख की कमी को दूर करने के लिए हमें अपने स्वार्थ को छोड़ना होगा और एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति और करुणा का भाव रखना होगा। हमें अपनी अपेक्षाओं को कम करना होगा और जो कुछ हमारे पास है, उसका सदुपयोग करना होगा। यदि हम ऐसा करेंगे, तो हम सुखी जीवन जीने में सफल हो सकते हैं।
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