जीवन का सार-जो तकलीफ खुद बर्दाश्त नहीं कर सकते वह दूसरों को क्यों दे?
संपादकीय
14 फरवरी 2025
*जीवन का सार-जो तकलीफ खुद बर्दाश्त नहीं कर सकते वह दूसरों को क्यों दे?*
जीवन में हमें अक्सर बुरे लोगों का सामना करना पड़ता है, लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि बुरे लोगों की जीत क्यों होती है? इसका जवाब बहुत ही सरल है - अच्छे लोगों की खामोशी। जब अच्छे लोग खामोश रहते हैं, तो बुरे लोगों को अपने गलत कामों को करने का मौका मिलता है। हमें यह याद रखना चाहिए कि जो तकलीफ़ हम खुद बर्दाश्त नहीं कर सकते, वह तकलीफ़ दूसरों को नहीं देनी चाहिए। हमें अपने जीवन में सुख और दुःख दोनों को स्वीकार करना चाहिए और बुरे लोगों की बुराई के सामने खामोश नहीं रहना चाहिए। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
जीवन में हमें सुख और दुःख दोनों का सामना करना पड़ता है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सुख और दुःख दोनों ही जीवन का हिस्सा हैं। हमें सुख की हंसी और दुःख की रुलाई दोनों को स्वीकार करना चाहिए। लेकिन जब हम बुरे लोगों की बुराई के सामने खामोश रहते हैं, तो हम अपने जीवन को बर्बाद कर लेते हैं।
बुरे लोगों की पहचान उनकी ख़राब नजरों से भी की जा सकती है। निगाहों के भिन्न भिन्न भाव भिन्न भिन्न प्रकार की बुराई के प्रतीक होते हैं, जिसे देखकर सहज ही समझा जा सकता है। कुछ बुरे लोग झूठ का सहारा लेकर अपनों की या दूसरों की जिंदगी में ज़हर घोलने का प्रयास करते हैं। इस तरह के बुरे लोग किसी का जीवन हमेशा के लिए बर्बाद कर देते हैं।
हमारे आधे दुःख गलत लोगों से उम्मीद रखने से होते हैं और बाकि आधे दुःख सच्चे लोगों पर शक करने से होते हैं। इसलिए, हमें अपने जीवन में सुख और दुःख दोनों को स्वीकार करना चाहिए और बुरे लोगों की बुराई के सामने खामोश नहीं रहना चाहिए। हमें अपने जीवन को सुखी और समृद्ध बनाने के लिए अच्छे लोगों के साथ सुकून से जीना चाहिए।
जीवन में बुरे लोगों की जीत तो उसी वक़्त तय हो जाती है, जिस वक़्त अच्छे लोग खामोश रहने का निर्णय ले लेते हैं । जो आपको धोखा दे गया, उसकी यादों में मरने से हज़ार गुना वह अच्छा है, जो साथ है, उसके साथ सुकून से जी लिया जाए । मानव जीवन में हंसी और रुलाई दोनों सदा रहते हैं। जैसे सबेरा होता है, शाम होती है, फिर सबेरा होता है, वैसे ही जीवन में दुख और सुख भी आते हैं, इस तरह सुख-दुख में हंसते रोते मानव जीवन आगे बढ़ता है। सुख की हंसी और दुख की रुलाई दोनों मानव जीवन का हिस्सा होता है।
कुछ बुरे लोगों की पहचान उनकी ख़राब नजरों से भी की जा सकती है। निगाहों के भिन्न भिन्न भाव भिन्न भिन्न प्रकार की बुराई के प्रतीक होते हैं, जिसे देखकर सहज ही समझा जा सकता है। कुछ बुरे लोग झूठ का सहारा लेकर अपनों की या दूसरों की जिंदगी में ज़हर घोलने का प्रयास करते हैं। इस तरह के बुरे लोग किसी का जीवन हमेशा के लिए बर्बाद कर देते हैं। हमारे आधे दुःख गलत लोगों से उम्मीद रखने से होते हैं और बाकि आधे दुःख सच्चे लोगों पर शक करने से होते हैं । नतीजन इतना जरूर याद रखना चाहिए जो तकलीफ़ हम खुद बर्दाश्त नहीं कर सकते, वह तकलीफ़ दूसरों को नहीं देनी चाहिए।
Comments
Post a Comment