भ्रम और जिंदगी: जरूरत और आदत के बीच का अंतर
संपादकीय
दिनांक 20 फरवरी 2025
भ्रम और जिंदगी: जरूरत और आदत के बीच का अंतर"
जीवन में हम अक्सर अपनी जरूरतों और आदतों के कारण दूसरों का इस्तेमाल करते हैं। हमें लगता है कि वे हमारे लिए जरूरी हैं, लेकिन वास्तव में यह एक भ्रम है। यह भ्रम हमें अपने जीवन में सही और गलत के बीच के अंतर को समझने में मदद नहीं करता है।
जब हम किसी की जरूरत होते हैं, तो हम उन्हें अपने जीवन में शामिल करते हैं। लेकिन जब हमें लगता है कि वे हमारे लिए जरूरी हैं, तो हम उन्हें अपने जीवन में अधिक महत्व देते हैं। यह हमें अपने जीवन में असंतुलन पैदा कर सकता है। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
हम किसी की जरूरत हो सकते हैं, आदत हो सकते हैं, परंतु हकीकत में जरूरी किसी के लिए नहीं होते क्योंकि लोग जरुरत के मुताबिक हमें इस्तेमाल करते हैं और हम ये सोचते हैं कि लोग हमें पसंद करते हैं । बस यही भ्रम है, जिंदगी का । बुरे वक्त में जो इंसान आपका साथ छोड़ दें तो ये मान लेना कि वो कभी आपके साथ था ही नहीं
। भ्रम होना एक तरह का ग्रे क्षेत्र है जहाँ कोई भी नहीं रहना चाहता। आज, खुद को भ्रमित कहना ज्ञान और विशेषज्ञता से ग्रस्त एक प्रतिस्पर्धी दुनिया में हीनता का संकेत भी हो सकता है। भ्रम से प्रभावित लोगों को तथ्यों या तर्क से यह विश्वास नहीं दिलाया जा सकता कि उनका भ्रमपूर्ण विश्वास झूठ है.
लोग अक्सर छोटी-छोटी गलतियों, त्रुटियों या अशुद्धियों का वर्णन करने के लिए “भ्रम” का उपयोग करते हैं।
चिकित्सा के दृष्टिकोण से, भ्रम का एक बहुत ही अलग अर्थ है। यह बदली हुई मानसिक स्थिति का एक रूप है, जो आपके मस्तिष्क के काम करने के तरीके में समस्या का संकेत देता है। कहते हैं कि बुरे वक्त में हमेशा अपने वक्त पर भरोसा रखें क्योंकि समय कोयलें को भी हीरा बना देता है ।
इसी तरह, जब हम किसी आदत के कारण दूसरों का इस्तेमाल करते हैं, तो हम उन्हें अपने जीवन में शामिल करते हैं। लेकिन जब हमें लगता है कि वे हमारे लिए जरूरी हैं, तो हम उन्हें अपने जीवन में अधिक महत्व देते हैं। यह हमें अपने जीवन में असंतुलन पैदा कर सकता है।
लेकिन जब हमें लगता है कि कोई हमारे लिए जरूरी नहीं है, तो हम उन्हें अपने जीवन से दूर कर देते हैं। यह हमें अपने जीवन में संतुलन पैदा कर सकता है।
इसलिए, हमें अपने जीवन में जरूरत और आदत के बीच के अंतर को समझना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि कौन हमारे लिए जरूरी है और कौन नहीं। हमें यह समझना चाहिए कि कौन हमारे लिए आदत है और कौन नहीं।
जैसा कि गुलजार साहब ने कहा है, "नेकियाँ ख़रीदीं है हमने, अपनी शोहरतें गिरवी रखकर, कभी फुर्सत में मिलना ऐ जिन्दगी, तेरा भी हिसाब कर देंगे।" यह पंक्तियाँ हमें यह समझने में मदद करती हैं कि हमें अपने जीवन में संतुलन पैदा करने के लिए जरूरत और आदत के बीच के अंतर को समझना चाहिए।
इसलिए, आइए हम अपने जीवन में जरूरत और आदत के बीच के अंतर को समझने का प्रयास करें। आइए हम अपने जीवन में संतुलन पैदा करने के लिए जरूरत और आदत के बीच के अंतर को समझने का प्रयास करें।
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