संगति और व्यक्तित्व का निखार

संपादकीय आलेख:
22 फरवरी 2025।
 *संगति और व्यक्तित्व का निखार* 
'जैसा खाएं अन्न, वैसा रहे मन। जैसी हो संगति वैसी को प्रगति।' व्यक्ति के आचरण और संगति का प्रभाव होता है कि उसका व्यक्तित्व का निखार किस ढंग से होगा व्यक्ति की संगति अच्छी है तो प्रगति भी होगी और यदि संगति गलत है तो निश्चित रूप से दुर्गति होगी। संगति का प्रभाव जैसे पारस पत्थर के पास रखा लोहा भी सोना बन जाता है। एक गंदा सेब अच्छे से फलों की टोकरी जो सेब से भरी पेटी को खराब कर देता है। इसलिए यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।

जीवन में हम अक्सर दूसरों के दिखावे से प्रभावित होते हैं और उनके व्यक्तित्व की पहचान उनके रंग, रूप, पहनावे या एक क्षण के आचरण से करते हैं। लेकिन क्या यह सही है? क्या हमें व्यक्तित्व की पहचान के लिए दिखावे से परे जाना चाहिए?

व्यक्तित्व की पहचान के लिए हमें दूसरों के वाणी, व्यवहार और कर्मों की सुगन्ध को समझना चाहिए। यही वह चीजें हैं जो हमें व्यक्तित्व की असली पहचान देती हैं।

आजकल दिखावे की दुनिया है और हम अक्सर इस दिखावे में फंस जाते हैं। हमें यह समझना चाहिए कि कौन हमारा अपना है और कौन पराया है। हमें अपनी भावनाओं के लिए इस बात की पहचान होनी बहुत जरूरी है।

व्यक्तित्व की पहचान के लिए हमें ज्ञान की महत्ता को समझना चाहिए। ज्ञान जिस किसी से भी मिले, उसे प्राप्त कर लेना चाहिए और बदले में कृतज्ञता अवश्य प्रकट करनी चाहिए।

कभी आपने सोचा है कि हमारा व्यवहार कैसे बनता है? व्यवहार क्या है? हम किसी से कैसे बात करते हैं, कैसे प्रतिक्रिया करते हैं, अपने मनोभावों को कैसे प्रकट करते हैं, यही व्यवहार है। हंसना, बोलना, बात करना, प्रतिक्रिया देना, हां-ना, सहायता करना, न करना, प्रसन्नता, नाराजगी, सम्मान-अपमान, सभी व्यवहार ही तो हैं। 
हर व्यक्ति का प्रयास रहता है कि वह सामने वाले से ऐसा अच्छा व्यवहार करे कि उसकी छवि अच्छी बनी रहे, किन्तु क्या सदैव ऐसा हो पाता है? नहीं। कारण, बहुत बार हमारा व्यवहार सामने वाले के व्यवहार की प्रतिच्छाया होता है क्योंकि हम एक साधारण इंसान हैं, कोई पहुंचे हुए धर्मात्मा नहीं, इस कारण सामने वाले का व्यवहार हमारे व्यवहार को बदल सकता है। 
किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व कि पहचान उसकी सहजता, उसकी सरलता से होती है। ना कि वेशभूषा और पहनावे से। अगर आप किसी के व्यक्तित्व की पहचान रंग , रूप , पहनावे या उसके एक क्षण के आचरण को देखकर करते हैं तो यह आपकी गलतफहमी है ।

आजकल दिखावे की दुनिया है। कुछ लोग इस बात को समझ जाते हैं और कुछ बहकावे में आ जाते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि आप किसी के दिखावे को प्यार समझ लेते हैं और इस वजह से आपका दिल टूट जाता है। अपनी भावनाओं के लिए आपको इस बात की पहचान होनी बहुत जरूरी है कि कौन आपका अपना है और कौन पराया है। 
मनुष्य की शोभा कपड़ों से नहीं बल्कि वाणी, व्यवहार और कर्मों की सुगन्ध से होती है। ज्ञान जिस किसी से भी मिले, उसे प्राप्त कर लेना चाहिए और बदले में कृतज्ञता अवश्य प्रकट करनी चाहिए। वक्त, इंसान और रिश्ते- इनका मूल्य और इनका महत्व इनके खो जाने के बाद ही समझ आता है। काश इनकी कीमत पहले समझी होती तो इंसान की अहमियत की पहचान ही अलग होती ।

आखिर में, हमें यह समझना चाहिए कि वक्त, इंसान और रिश्ते- इनका मूल्य और इनका महत्व इनके खो जाने के बाद ही समझ आता है। हमें इनकी कीमत पहले समझनी चाहिए ताकि हम इनका सही मूल्य समझ सकें।

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