रिश्तों की सच्चाई: स्वार्थ या प्रेम?
संपादकीय:
दिनांक 27 फरवरी 2025
_"रिश्तों की सच्चाई: स्वार्थ या प्रेम?"_
रिश्तों की मधुरता केवल प्रेम की ही दौलत होती है। प्रेम में जहां स्वार्थ नजर आए वहां रिश्ते या तो शर्मसार होते हैं। या फिर टिक ही नहीं पाते हैं । रिश्तो में प्रेम की बजाय स्वार्थ का मिश्रण ज्यादा हो तो रिश्ते स्वार्थ के बली चढ़कर टूट ही जाते हैं। जीवन को सुखी या दुखी रखने के संसाधनों में रिश्तों का बड़ा महत्व है जिन लोगों के रिश्ते सीमित होते हैं वे लोग दुखों से घिरे हुए होते हैं अक्सर लोग रिश्तों से जुड़कर स्वार्थ की प्रतिपूर्ति में छूट रहते हैं ऐसे लोग दुख के भाग्य बनते हैं निस्वार्थ पूर्ण प्रेम-भाव की खेती से सींचे गए रिश्ते हमेशा फलीभूत होते हैं। रिश्तो की सच्चाई में स्वार्थ से नुकसान और प्रेम से फायदे के संदर्भ में मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
किसी भी रिश्ते को खराब होने का पूर्ण जिम्मेदार हमेशा सामने वाला ही नहीं होता, बल्कि कहीं ना कहीं आप भी होते हो। इसलिए जब भी रिश्तों के प्रति प्रेम, कर्तव्य, कृतज्ञता की भावना ही खत्म हो जाए तो ऐसे रिश्ते को बोझ की तरह ढ़ोने से अच्छा है कि आप स्वयं को और अपने रिश्तों को समय दें, जिससे आप उनमें हुई गलतियों को समझ सकें ।
कहते हैं कि केवल रक्त संबंध से कोई अपना नहीं होता, बल्कि प्रेम, सहयोग, विश्वास, और सम्मान ये सारे ऐसे भाव हैं, जो परायों को भी अपना बना देते हैं । अगर जिंदगी में सच्चा प्रेम लिखा है, तो उस इंसान को चाहे हजारों इंसानों में खड़ा कर दो, वो फिर भी आपका ही रहेगा । रिश्ते तभी फलते-फूलते हैं, जब दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे का समर्थन और सम्मान करें।
स्वार्थ को हटाकर यदि रिश्ता प्यार और पारस्परिकता पर आधारित हो, तो यह जीवन को सुखद बना देता है। लोग स्वार्थ के लिए रिश्ते बनाते हैं, लेकिन ऐसे रिश्ते स्वार्थ पूरा होने के बाद टूट जाते हैं, जिन रिश्तों में स्वार्थ होता है, अक्सर वे अधिक समय तक टिक नहीं पाते हैं। अगर रिश्तों में प्रेम और नि:स्वार्थ की भावना होगी तो वे आजीवन बने रहते हैं। वर्तमान में कोई खाली नहीं है, सभी भरे हुए हैं। कोई प्रेम से भरा है, कोई घृणा से, कोई स्मृतियों और कोई दुःख से भरा है । अगर गहनता से गौर करें तो रिश्तों में आने वाली खटास और मनमुटाव का मुख्य कारण स्वार्थ ही है। वैसे भी चतुरयुग चल रहा है, इसलिए ये विचार दिल से निकाल दीजिए कि बिना स्वार्थ के कोई आपसे रिश्ता रखेगा । हकीकत में साथ तो अंत में जिंदगी भी छोड़ जाती है, फिर इंसान क्या चीज है ।
आज के परिवर्तनशील माहौल में आमतौर पर लोग अपने स्वार्थ के लिए मित्रता करते हैं, रिश्ते बनाते हैं, लेकिन ऐसे रिश्ते स्वार्थ पूरा होने के बाद टूट जाते हैं। जिन रिश्तों में स्वार्थ होता है, अक्सर वे अधिक समय तक टिक नहीं पाते हैं।रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट के अध्ययन के अनुसार, लगभग 70% लोग अपने रिश्तों में स्वार्थ के कारण निराश होते हैं। यह आंकड़ा बताता है कि स्वार्थ रिश्तों को कितना प्रभावित कर सकता है।
अगर रिश्तों में प्रेम और नि:स्वार्थ की भावना होगी तो वे आजीवन बने रहते हैं।नेशनल सेंटर फॉर हेल्थ स्टैटिस्टिक्स के एक अन्य अध्ययन के अनुसार, लगभग 90% जोड़े जो अपने रिश्तों में प्रेम और समर्थन को महत्व देते हैं, उनके रिश्ते लंबे समय तक टिके रहते हैं। वर्तमान में कोई खाली नहीं है, सभी भरे हुए हैं। कोई प्रेम से भरा है, कोई घृणा से, कोई स्मृतियों और कोई दुःख से भरा है । अगर गहनता से गौर करें तो रिश्तों में आने वाली खटास और मनमुटाव का मुख्य कारण स्वार्थ ही है।
एक उदाहरण के रूप में, मान लीजिए कि आपका एक मित्र है जो आपके साथ केवल इसलिए रहता है क्योंकि वह आपके पैसे और संसाधनों का उपयोग करना चाहता है। ऐसे मित्र के साथ आपका रिश्ता कितना मजबूत हो सकता है? निश्चित रूप से, ऐसे रिश्ते में स्वार्थ की भावना होती है, जो रिश्ते को कमजोर बना देती है।इसलिए, हमें रिश्तों में स्वार्थ की भावना को हटाने की आवश्यकता है। हमें अपने रिश्तों में प्रेम, समर्थन, और नि:स्वार्थ की भावना को महत्व देना चाहिए। कहते हैं कि केवल रक्त संबंध से कोई अपना नहीं होता, बल्कि प्रेम, सहयोग, विश्वास, और सम्मान ये सारे ऐसे भाव हैं, जो परायों को भी अपना बना देते हैं । अगर जिंदगी में सच्चा प्रेम लिखा है, तो उस इंसान को चाहे हजारों इंसानों में खड़ा कर दो, वो फिर भी आपका ही रहेगा ।
रिश्ते तभी फलते-फूलते हैं, जब दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे का समर्थन और सम्मान करें। स्वार्थ को हटाकर यदि रिश्ता प्यार और पारस्परिकता पर आधारित हो, तो यह जीवन को सुखद बना देता है।
हमें अपने रिश्तों में स्वार्थ की भावना को हटाने की आवश्यकता है। हमें अपने रिश्तों में प्रेम, समर्थन, और नि:स्वार्थ की भावना को महत्व देना चाहिए।
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