एकाकी जीवनशैली और कुंठा

संपादकीय:
4 फरवरी 2025 
 *"एकाकी जीवनशैली और कुंठा"* 

आज के समय में एकाकी जीवनशैली एक बड़ी समस्या बन गई है। लोग अपने परिवार और समाज से दूर होकर अकेले जीवन जीने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, वे कुंठा और अवसाद के शिकार हो रहे हैं।
यही कारण है कि आज हर व्यक्ति की सोच बनती जा रही है कि मैं और मेरो नाथों फोड़ा दूसरा को माथो अर्थात एकलखोर जीवन शैली से मोह रखने वाले लोगों की काफी तादाद बढ़ती जा रही है। जिन उम्मीदों के साथ मां-बाप अपने बच्चों की परवरिश कर अपनी जीवन की कायनात बच्चों को सक्सेस बनाने पर खर्च कर रहे हैं वे बच्चे ही पलायन होकर शहरों में बस रहे हैं वही बुजुर्ग गांव में जर्जर जीवन गुजार रहे हैं। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।

एकाकी जीवनशैली में लोग अपने सुख-दुःख को किसी के साथ बांटने का मौका नहीं पाते हैं। इसके कारण, वे अपने दुखों को दबाए रखते हैं और धीरे-धीरे कुंठा के शिकार हो जाते हैं।

इसके अलावा, एकाकी जीवनशैली में लोग अपने परिवार और समाज से दूर हो जाते हैं। इसके कारण, वे अपने रिश्तों को मजबूत बनाने का मौका नहीं पाते हैं और धीरे-धीरे अकेले हो जाते हैं।

एकाकी जीवनशैली के चलते आज देश में परिवार टूट रहे हैं क्योंकि जिन बच्चों को मां बाप पाल पोस व पढ़ा लिखाकर उनका उज्ज्वल भविष्य बनाने में सबकुछ न्यौछावर कर देते हैं, वही बच्चे उन्हें बेसहारा छोड़कर बाहर बस जाते हैं।

 अक्सर महानगरों में यह समस्या विकराल रूप ले रही है। एकाकी जीवनशैली में अधिकतर लोग खुद को ऐसे रिश्तों में जकड़े हुए पाते हैं, जो उन्हें दुखी करते हैं, लेकिन उन्हें खत्म नहीं कर पाते। वर्तमान समय में एकाकी जीवन शैली कुंठा का एक प्रमुख कारण है। जब हमारे आसपास सुख – दुःख बांटने के लिए कोई नहीं होता तो वहीं से हमारा मन कुंठाग्रस्त होने लगता है।

केवल असफलता ही कुंठा का कारण नहीं होती अपितु वो सफलता भी कुंठा का कारण होती है, जिसमें हमारा कोई अपना प्रशंसा करने वाला नहीं होता है। जिस परिवार में लोग आपसी तालमेल से एक दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी होना जानते हैं, वह परिवार हमेशा कुंठा मुक्त, अवसाद मुक्त एवं खुशहाल होता है। अवसाद से बचना है तो परिवार के लोगों और मित्रों के साथ समय व्यतीत कीजिए।

 एक दूसरे के साथ मिलकर मुस्कुराइए, अपना सुख-दुःख बांटिए, नहीं तो जीवन में पैसा तो बहुत रहेगा लेकिन प्रसन्नता चली जाएगी।
इस समस्या का समाधान यह है कि हम अपने परिवार और समाज के साथ जुड़े रहें। हमें अपने सुख-दुःख को अपने परिवार और मित्रों के साथ बांटना चाहिए। इससे हम अपने रिश्तों को मजबूत बना सकते हैं और कुंठा और अवसाद से बच सकते हैं।

इसलिए, हमें अपने जीवन में एकाकी जीवनशैली को छोड़ना चाहिए और अपने परिवार और समाज के साथ जुड़ना चाहिए। इससे हम अपने जीवन को खुशहाल और संतुष्ट बना सकते हैं।

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