राग और द्वेष: जीवन की सबसे बड़ी बाधा
संपादकीय:
7 फरवरी2025
"राग और द्वेष: जीवन की सबसे बड़ी बाधा"
आज के समय में, हमारा देश, समाज और परिवार कलह से ग्रस्त है। इसका मुख्य कारण है राग और द्वेष से उपजी जीवनशैली। राग और द्वेष दोनों एक दूसरे के विपरीत हैं, लेकिन दोनों ही जीवन को नकारात्मक दिशा में ले जाते हैं।
राग में जन्मती हैं अपेक्षाएं, और अपेक्षा जब टूट जाती है तो उत्पन्न होता है द्वेष। यही कारण है कि अक्सर परिवारों में पति-पत्नी के बीच कलह होती है। दोनों एक दूसरे से द्वेष रखने लगते हैं और सम्बंध में प्रेम नाम मात्र का रह जाता है। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
राग और द्वेष से उपजी जीवनशैली के कारण वर्तमान में हमारा देश, समाज और परिवार कलह से ग्रस्त है। राग और द्वेष दोनों एक दूसरे के विपरीत हैं । जैसे तुम्हें किसी से घृणा हो गयी हो और तुम्हें कोई फूटी आँख न सूहाय तो इसका मतलब है कि उसके प्रति तुम द्वेष रखते हो । द्वेष अगर कहीं है तो इसकी पूरी सम्भावना है कि पहले कहीं राग रहा होगा । राग में जन्मती हैं अपेक्षाएं, और अपेक्षा जब टूट जाती है तो उत्पन्न होता है द्वेष ।
अक्सर परिवारों में यह आमबात है कि अधिकांश पति पत्नी कुछ समय बाद एक दूसरे से द्वेष रखने लगते हैं । छोटी छोटी बातों पर कलह करते हैं । सम्बंध में प्रेम नाम मात्र का रह जाता है । केवल ज़रूरतें और समाज का डर रह जाता है ।
कभी गौर किया कि ऐसा क्यों होता है ? क्योंकि हम राग में पड़ जाते हैं । हमारा मोह इतना अधिक हो जाता है कि हमें वास्तविकता दिखती ही नहीं देती परंतु सच्चाई तो सामने आती ही है और पीड़ा तब होती है, कोई पति पत्नी परस्पर प्रेम नहीं करते । पति प्रेम केवल इस लिए करता है कि उसको पत्नी पर आसक्ति है राग है । क्योंकि पत्नी उसे सुख देती है, उसका घर व बच्चे सम्भालती है और पति उस पर आश्रित है । इसी तरह पत्नी भी पति को पति होने के लिए प्रेम नहीं करती बल्कि इसलिए करती है क्योंकि उसका भी पति से राग है । वो उसे सम्भालता है, घर का ख़र्चा व राशन आदि का बोझ उठाता है और उसे समाज में पति की वजह से ही पूरा मान सम्मान मिलता है । उसे और उसके बच्चे को सुरक्षा मिलती है ।
हमारे देश में तो स्त्रियों के ऐसे हाथ पैर बांध दिए जाते हैं कि वो बिना पति के अपनी ज़िंदगी में कुछ सोच ही नहीं सकती । अपेक्षाएं हैं तो टूटेंगी ही, फिर वही जन्मेगा द्वेष क्योंकि आप जैसा चाहो बिलकुल वैसा प्रेम आपको कोई नहीं दे पाएगा । इसलिए द्वेष से मुक्ति पाना है तो राग को छोड़ना ही होगा । आज भौतिकवादी जीवनशैली में इंसान इतना त्रस्त-व्यस्त और भ्रमित हो गया है कि वह अपनी संस्कृति और संस्कार से वंचित होकर जीवन को पशुवत ढ़ो रहा है, जबकि राग-द्वेष रहित जीवनचर्या स्वयं के साथ साथ समाज व परिवार में भी अपार सुख प्रदान करती है।
इस समस्या का समाधान है राग को छोड़ना। जब हम राग से मुक्त होते हैं, तो हमारे जीवन में सुख और शांति आती है। हम अपने सम्बंधों को बेहतर बना सकते हैं और अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं।
आज के समय में, जब हम भौतिकवादी जीवनशैली में फंसे हुए हैं, राग और द्वेष से मुक्ति पाना बहुत जरूरी है। हमें अपनी संस्कृति और संस्कार को याद रखना चाहिए और राग-द्वेष रहित जीवनचर्या को अपनाना चाहिए। इससे हम स्वयं के साथ-साथ समाज और परिवार में भी अपार सुख प्रदान कर सकते हैं।
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