होली: परोपकार और उत्साह का पर्व
संपादकीय
*होली: परोपकार और उत्साह का पर्व*
13 मार्च 2025
होली का त्यौहार हमारे जीवन में उमंग और उत्साह का संचार करता है। यह एक ऐसा अवसर है जब हम अपने मन के विकारों को निकालते हैं और परोपकार की भावना से सर्व कल्याण की बात सोचते हैं।
परोपकार का अर्थ है दूसरों पर उपकार। यह एक ऐसी भावना है जो हमें दूसरों की भलाई और सहयोग के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित करती है। परोपकार हमारे जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है और हमें एक बेहतर इंसान बनाता है।
होली के अवसर पर, हमें अपने जीवन में परोपकार की भावना को बढ़ावा देने का संकल्प लेना चाहिए। हमें अपने आसपास के लोगों की मदद करने के लिए आगे आना चाहिए और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए कार्य करना चाहिए। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
रंगों के त्यौहार होली उमंग और उत्साह का पर्व है। इसे मनाने के साथ किसान अपने खेतों में उगी हुई फसल का पहला अनाज अग्नि को समर्पित कर,अपने घर में नए अनाज की बालियां रखता है। इसी के साथ नए अनाज की घर में आवक का संकेत मिलता है। इस बार होली के बहाने अपने मन के विकार निकलते हुए परोपकार की भावना से सर्व जीव कल्याण की भावना विकसित कीजिए। सत्य बात को कहने के लिए वचनबद्ध हो। ताकि रंगों का त्यौहार अपनी खुशबू की आभामंडल से सामाजिक परोपकार करने की भावना जागृत करें।
परोपकार’ का अर्थ है दूसरों पर उपकार। दूसरों पर उपकार का तात्पर्य दूसरों की भलाई और सहयोग के लिये कार्य करना है, बेशर्ते कि इस भलाई के कार्य में अपना कोई निजी स्वार्थ ना हो। ये करुणा दया, ममता, पुण्य और स्नेह से परिपूर्ण भावना होती है। संसार, समाज और परिवार की व्यवस्था को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने के लिए परोपकार और सहयोग बहुत ही जरुरी है क्योंकि सभी प्राणियों का जीवन एक दूसरे के सहयोग व परोपकार पर ही आश्रित है। हम जब दूसरों के सहयोग और उपकार के पात्र बनते रहते हैं तो दूसरों का सहयोग व उपकार करना भी हमारा कर्तव्य बन जाता है ।
परोपकार व सहयोग का उद्देश्य सामाजिक समस्याओं से निपटना भी है, आदर्श रूप से सार्थक, संरचनात्मक परिवर्तन करना है जो कई लोगों के जीवन को सकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है। दूसरी ओर, दान मुख्य रूप से सामाजिक समस्याओं के कारण होने वाली पीड़ामंढंघ् ही सीमित ना रखकर दूसरे के लिए भी यह जीवन काम में आए, ऐसा लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और सामाजिक तिरस्कार व नियत के कोप से बचना है तो फिर मनुष्य के लिए परोपकार, सहयोग व पुण्य के कर्म में ही प्रवृत रहना श्रेष्ठकर है।
परोपकार के महत्व को समझने के लिए, हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारा जीवन एक दूसरे के सहयोग और परोपकार पर ही आश्रित है। जब हम दूसरों के सहयोग और उपकार के पात्र बनते रहते हैं, तो दूसरों का सहयोग व उपकार करना भी हमारा कर्तव्य बन जाता है।
होली का त्यौहार हमें यह भी याद दिलाता है कि हमारे जीवन का उद्देश्य केवल अपने स्वार्थ की पूर्ति नहीं है, बल्कि दूसरों की भलाई और सहयोग के लिए कार्य करना भी है। जब हम परोपकार की भावना से कार्य करते हैं, तो हम अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं और दूसरों के जीवन को भी बेहतर बनाते हैं।
इसलिए, होली के अवसर पर, हमें परोपकार की भावना को बढ़ावा देने का संकल्प लेना चाहिए और अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाने के लिए कार्य करना चाहिए।
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