लालच का जाल: इंसान का असली स्वभाव

संपादकीय। 
19 मार्च 2025।

*लालच का जाल: इंसान का असली स्वभाव*
मन चंचल चित चोर निहारता हूं तुम्हें नजर आती है कोई और। दिल थामकर तस्वीर तो तुम्हारी बना लेता हूं, लेकिन रंग भर जाता है कहीं और। अर्थात मानव का स्वभाव का कपटी लालची व दुराचारी हो गया है।
आज का मानव बहुरूपिया बन गया है, उसका स्वभाव जटिलताओं का केंद्र बन गया है। हर किसी के साथ और हर स्थान पर लोभ और लालच से पेश आता है। लेकिन क्या हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हम किस तरह के लोगों के साथ जी रहे हैं?

महात्मा बुद्ध ने ठीक ही कहा है कि जो पल वर्तमान में आप जी रहे हैं, वही आपका है। जो समय बीत गया, वह भूत हो गया और जो आने वाला है, उस पर आपका वश नहीं है, फिर भविष्य की चिंता क्यों? इसलिए स्वस्थ रहें, मस्त रहें, हंसते और हंसाते रहें, कभी अपने लिए, कभी अपनों के लिए। यह मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
आज के समय में इंसान का स्वभाव कितना बदल गया है, यह देखना दिलचस्प है। लालच और लोभ ने इंसान को अपने जाल में फंसा लिया है। हर कोई अपने स्वार्थ के लिए दूसरों का उपयोग करने की कोशिश करता है।
लालची और लोभी इंसान अपने कपट-व्यवहार को कितना ही छिपाये, देर-सबेर प्रकट हो ही जाता है। उनकी असली प्रकृति मुश्किल समय में ही सामने आती है। जब इंसान मुश्किलों, दबावों या संकटों का सामना करता है, तो उसकी भावनाएं, सोच, और रियेक्ट करने के तरीके अधिक प्रकट होते हैं।

इंसान का असली स्वभाव मुश्किल समय में ही सामने आता है और इसका एक खास कारण है, जब इंसान मुश्किलों, दबावों या संकटों का सामना करता है तो उसकी भावनाएं, सोच, और रियेक्ट करने के तरीके अधिक प्रकट होते हैं। इस समय, व्यक्ति अपनी असल प्रकृति को बिना किसी झिझक के व्यक्त करता है क्योंकि तनाव और दबाव की स्थिति में आदतें और आंतरिक प्रवृत्तियां सामने आती हैं। अक्सर हर इंसान का स्वभाव लालची होता है और जो इंसान इस लालच से उबर जाते हैं, वे अपना जीवन सुखमय बिताते हैं । कुछ लोग वर्तमान में जीते हैं, वे कल की चिंता नहीं करते हैं । अधिकतर लोग ऐसे भी हैं जो कल की नहीं, बल्कि दस बीस साल बाद की चिंता में डूबे रहते हैं । वे यह नहीं सोचते कि कल मैं जिंदा रहूंगा या नहीं, लेकिन चिंता उन्हें अनागत भविष्य की खाए जाती है ।
लालची और लोभी व्यक्ति अपने कपट-व्यवहार को कितना ही छिपाये देर-सबेर प्रकट हो ही जाता है। आज का मानव बहुरूपिया बन गया है, उसका स्वभाव जटिलताओं का केंद्र बन गया है। हर किसी के साथ और हर स्थान पर लोभ और लालच से पेश आता है।  जो पल वर्तमान में आप जी रहे हैं, वही आपका है । जो समय बीत गया, वह भूत हो गया और जो आने वाला है, उस पर आपका वश नहीं है, फिर भविष्य की चिंता क्यों ? इसलिए स्वस्थ रहें, मस्त रहें, हंसते और हंसाते रहें, कभी अपने लिए, कभी अपनों के लिए।
 हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि लालची और लोभी इंसान का असली स्वभाव क्या होता है। हमें यह भी समझने का अवसर मिलता है कि वर्तमान में जीना कितना महत्वपूर्ण है और भविष्य की चिंता क्यों नहीं करनी चाहिए।

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