समय और सांसें: जीवन के दो अमूल्य धन
संपादकीय
28 मार्च 2025 HIRD हॉस्टल नीलोखेड़ी।
*समय और सांसें: जीवन के दो अमूल्य धन*
समय ही धन है। हर व्यक्ति के जीवन में समय एक ऐसी संपत्ति है। जो मुफ्त में मिलती है। यह समय रूपी संपत्ति जो खो जाने यि बीत जाने के बाद कभी वापस लौट कर नहीं आती है। समय अपनी धूरी पर गति करता है। समय की धूरी के साथ व्यक्ति अपनी प्रगति कर सकता है। समय का सिद्धांत है, यदि समय के साथ कोई व्यक्ति नहीं चलता है। तो वह उसे किनारे पर धकेल कर समय आगे बढ़ जाता है। जीवन में समय कभी लौटकर नहीं आया इसलिए समय की कदर करना सीखें, जो बीत गया उसे बिसराई है और मूल्यांकन कीजिए आगे बढ़िए ,क्योंकि आने वाले समय के साथ फिर तालमेल नहीं बना तो यह समय भी बीत जाएगा बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता है। ठीक उसी प्रकार से जीवन में सासों का भी निश्चित दायरा है। व्यक्ति को अपने सांसों का भी कदर करना सीखना चाहिए क्योंकि जीवन में समय और सांसें दो ऐसे अमूल्य धन हैं जो हमें प्राप्त होते हैं। ये दोनों ही निश्चित और सीमित हैं, इसलिए इनका समझदारी से उपयोग करना आवश्यक है।
समय जीवन का सबसे कीमती संसाधन है। यह ऐसा अमूल्य खजाना है जिसे किसी भी कीमत पर वापस नहीं पाया जा सकता। समय का प्रभावी उपयोग न केवल हमारी व्यक्तिगत प्रगति में मदद करता है, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति में भी योगदान करता है।
समय जीवन का सबसे कीमती संसाधन है। यह ऐसा अमूल्य खजाना है जिसे किसी भी कीमत पर वापस नहीं पाया जा सकता। समय का प्रभावी उपयोग न केवल हमारी व्यक्तिगत प्रगति में मदद करता है, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति में भी योगदान करता है। इंसान ही इंसान की दवा है । जैसे-जैसे हमारी जागरूकता में तीव्रता और पैनापन आने लगता है, एक बात जिसके बारे में हम स्वाभाविक रूप से सबसे पहले जागरूक होते हैं, वह है सांस। हमारे शरीर में चलने वाली सांस, एक यांत्रिक प्रक्रिया है, जो लगातार बिना रुके चलती है। यह बहुत आश्चर्यजनक है कि कैसे अधिकतर लोग इसके बारे में जागरूक हुए बिना ही जीते रहते हैं, लेकिन एक बार जब आप सांस के बारे में जागरूक हो जाते हैं, तो ये एक अदभुत प्रक्रिया बन जाती है। दुःख देता है, तो कोई सुकून बन जाता है । जीवन में केवल दो ही वास्तविक धन हैं “समय और सांसें” और दोनों ही निश्चित और सीमित हैं ।
इसलिए समय और सांसों को समझदारी से खर्च करें क्योंकि प्रेम, सहयोग, विश्वास, निष्ठा, सुरक्षा, सहानुभूति और सम्मान, ये सभी ऐसे भाव हैं, जो परायों को भी अपना बना देते हैं। कहते हैं कि त्याग स्नेह से श्रेष्ठ है, चरित्र सुंदरता से श्रेष्ठ है, मानवता सम्पत्ति से श्रेष्ठ है, परंतु परस्पर सम्बन्धों को जीवित रखने से अधिक अन्य कुछ भी श्रेष्ठ नहीं है क्योंकि पारस्परिक संबंधों को सहानुभूति से कई तरह से लाभ मिलता है। जब आप दिखाते हैं कि आप वही महसूस करते हैं जो कोई और महसूस कर रहा है, तो इससे दूसरे व्यक्ति को अपनेपन का एहसास होता है। इससे दूसरों को यह महसूस होता है कि उन्हें समझा जा रहा है, और यह समझ ही रिश्तों में विश्वास और निकटता की नींव के रूप में काम करती है ।
सांसें भी जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हमारे शरीर में चलने वाली सांस एक यांत्रिक प्रक्रिया है, जो लगातार बिना रुके चलती है। सांस के बारे में जागरूक होने से हमें जीवन की सच्चाई का एहसास होता है। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
इन दोनों अमूल्य धनों का समझदारी से उपयोग करने से हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं। हमें समय और सांसों को समझदारी से खर्च करना चाहिए, ताकि हम अपने जीवन को सकारात्मक और सार्थक बना सकें।
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