क्रोध और प्रेम - दो विपरीत भावनाएं
संपादकीय:
2 मार्च 2025
*क्रोध और प्रेम - दो विपरीत भावनाएं*
आज के समय में हमारे जीवन में कई चुनौतियां और समस्याएं हैं। इन समस्याओं का सामना करने के लिए हमें अपने मन और मस्तिष्क को शांत और स्थिर रखना होता है। लेकिन कई बार हम क्रोध और प्रेम जैसी दो विपरीत भावनाओं के बीच में फंस जाते हैं।
क्रोध और प्रेम दो विपरीत भावनाएं हैं जो हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं। हमें अपने क्रोध को नियंत्रित करना चाहिए और शांति को अपनाना चाहिए। इसके अलावा, हमें अपने जीवन में प्रेम को बढ़ावा देना चाहिए। यदि हम ऐसा करेंगे, तो हम अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं और खुशी और शांति को प्राप्त कर सकते हैं। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
जो बात प्रेम से समझाई जा सकती है, उसके लिए तैश खाना वैसी ही नासमझी है, जैसे सुई से निपटने वाले काम के लिए तलवार चलाना । क्रोध आने का प्रमुख कारण व्यक्तिगत या सामाजिक अवमानना है। उपेक्षित तिरस्कृत और अहंकारी समझे जाने वाले लोग अधिक क्रोध करते हैं क्योंकि वे क्रोध जैसी नकारात्मक गतिविधि के द्वारा भी समाज को दिखाना चाहते है कि उनका भी बहुत बड़ा अस्तित्व है। क्रोध का ध्येय किसी व्यक्ति विशेष या समाज से प्रेम की अपेक्षा करना भी होता है ।
क्रोध शांति भंग करने वाला एक मनोविकार है, जिस पर नियंत्रण स्थापित करना आवश्यक होता है। कहते हैं कि एक बार क्रोध करने से दिमाग की 10,000 ज्ञान-कोशिकाएं जलकर नष्ट हो जाती है और इस स्थिति में क्रोध, नाराजगी, ईर्ष्या और घृणा आदि को निष्छल निस्वार्थ प्रेम से ही जीता जा सकता है ।
वहीं असली प्रेम वह होता है जिसमें किसी से बिना शर्त और बिना किसी स्वार्थ के प्यार किया जाए क्योंकि प्यार या प्रेम एक एहसास है, जो दिमाग से नहीं, दिल से होता है और इसमें अनेक भावनाओं व अलग अलग विचारों का समावेश होता है। प्रेम स्नेह से लेकर खुशी की ओर धीरे धीरे अग्रसर करता है। ये एक मज़बूत आकर्षण और निजी जुड़ाव की भावना है जो सब-कुछ भूलकर उसके साथ जाने के लिए प्रेरित करता है ।
इसलिए संकल्प लीजिए कि आप सभी धैर्य और शांति रख कर अपनी ज्ञान-कोशिकाओं का पोषण करेंगे, ना कि क्रोध और विकारों के द्वारा उनका शोषण। हो सके तो स्वयं को माचिस की तीली ना बनाएं, जो थोड़ा-सा घर्षण लगते ही सुलग उठे। स्वयं को शांत सरोवर बनाएं जिसमें कोई अंगारा फेंके तो वह खुद ही बुझ जाए ।
क्रोध एक ऐसी भावना है जो हमें नुकसान पहुंचा सकती है। जब हम क्रोधित होते हैं, तो हम अपने आसपास के लोगों और चीजों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, क्रोध हमारे स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए, हमें अपने क्रोध को नियंत्रित करना चाहिए और शांति को अपनाना चाहिए।
दूसरी ओर, प्रेम एक ऐसी भावना है जो हमें खुशी और शांति प्रदान करती है। जब हम प्रेम को अपनाते हैं, तो हम अपने आसपास के लोगों और चीजों के प्रति सहानुभूति और करुणा की भावना को विकसित करते हैं। इसके अलावा, प्रेम हमें अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाने में मदद करता है। इसलिए, हमें अपने जीवन में प्रेम को बढ़ावा देना चाहिए।
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