मां: एक अहसास जो शब्दों से परे है--मातृत्व दिवस विशेष

संपादकीय 
11 मई 2025
*"मां: एक अहसास जो शब्दों से परे है।* 
जब शब्द मौन हो जाएं, और भावनाएं उमड़ पड़ें, तो समझिए — वहां मां की उपस्थिति है। मां केवल एक रिश्ता नहीं, वह एक अनुभव है, एक भावना है जो जीवन के हर मोड़ पर हमारे साथ रहती है — चुपचाप, लेकिन अडिग।
मां को परिभाषित करना उतना ही कठिन है जितना आसमान को हथेली में भरना। वह सुबह की पहली किरण है जो हमारे जीवन में उजाला लाती है, वह रात की वह आखिरी प्रार्थना है जो हमारी सलामती के लिए भगवान से की जाती है। मां वह धड़कन है जो हमारे जन्म से पहले ही हमारे साथ धड़कने लगती है, और अंतिम सांस तक हमारे लिए धड़कती रहती है। यह मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है। 
मां का प्यार न मापा जा सकता है, न तौला जा सकता है। वह उस दीपक की तरह है, जो खुद जलता है ताकि हमारे जीवन में उजाला बना रहे। मां के प्रेम में न अपेक्षा होती है, न स्वार्थ। जब हम थक कर लौटते हैं, तो उसका आंचल हमारी थकान सोख लेता है। जब हम टूटते हैं, तो उसकी गोद हमें फिर से जोड़ देती है।

बचपन में जब हम गिरते थे, मां दौड़कर आती थी — घाव से ज्यादा उसकी चिंता हमारे आंसूओं की होती थी। और आज जब हम जीवन की ठोकरों से गिरते हैं, मां की आवाज ही हमें फिर खड़ा होने की ताक़त देती है — "कोई बात नहीं बेटा, मैं हूं ना!"
आज के इस तेज़ रफ्तार, डिजिटल युग में भले ही हमारी ज़िंदगियां स्क्रीन पर सिमट गई हों, लेकिन मां का ममत्व अब भी वैसा ही है — वास्तविक, आत्मीय और समय से परे। वह व्हाट्सएप पर "खाना खाया?" पूछती है, और जब हम 'हां' में जवाब देते हैं, तो भी तसल्ली नहीं होती, अगले कॉल में फिर पूछती है, "सच में ठीक हो ना?" उसकी ममता तकनीक से नहीं, दिल से संचालित होती है।

मां अक्सर बहुत कुछ कहती है बिना बोले — उसकी आंखों में हमारी चिंता छुपी होती है, उसकी चुप्पी में हमारी गलतियों के लिए माफ़ी होती है। और उसकी मुस्कान में वह सुकून होता है जो पूरी दुनिया की दौलत भी नहीं दे सकती।
कभी वक़्त निकालकर देखिए, मां की हथेलियों की रेखाएं — वहां हमारी पूरी ज़िंदगी बसी होती है। उन हाथों ने न जाने कितनी बार हमारे लिए रोटियां बेलीं, बुखार में माथा सहलाया, हमारे बाल संवारे, और बगैर थके दिन-रात हमें बेहतर बनाने की कोशिश की।

हर दिन मां का है, लेकिन मातृत्व दिवस हमें एक विशेष अवसर देता है — मां के समर्पण को महसूस करने का, उनके सामने सिर झुकाने का, और उन्हें यह कहने का कि "आप हमारे लिए सब कुछ हैं मां।"
इस दिन फूल देना, मिठाई देना अच्छा है — पर सबसे कीमती उपहार होगा समय। मां के पास बैठिए, उनका हालचाल पूछिए, उन्हें बताइए कि आप उनके आभारी हैं। उनका हाथ थामिए और कहिए — "मां, आपकी जगह कोई नहीं ले सकता।"

अंत में... मां के लिए शब्द हमेशा कम पड़ जाते हैं। वह हर उस पल में शामिल होती है जब हम अपने जीवन की ऊँचाइयां छूते हैं, और हर उस क्षण में साथ खड़ी होती है जब हम टूटते हैं। वह कभी थकती नहीं, कभी पीछे नहीं हटती।
तो इस मातृत्व दिवस पर आइए, हम न केवल अपनी मां का आभार व्यक्त करें, बल्कि उनके नाम को अपनी कामयाबी, अपने संस्कारों और अपने जीवन की हर अच्छाई में समाहित करें।
क्योंकि सच यही है —
"जहां मां होती है, वहां ईश्वर मुस्कुराता है।"

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