कौशलयुक्त युवा ही आत्मनिर्भर भारत की रीढ़

संपादकीय 
24 मई 2025
 *कौशलयुक्त युवा ही आत्मनिर्भर भारत की रीढ़* 

भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश है। यह जनसांख्यिकीय लाभांश  देश की सबसे बड़ी ताकत है, परंतु यह तब तक लाभ नहीं दे सकता जब तक युवा वर्ग में आवश्यक व्यावसायिक और तकनीकी कौशल विकसित न हो। आज का यथार्थ यह है कि लाखों युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश को रोजगार के लायक कौशल नहीं मिल पाता, जिससे देश में शिक्षित बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
आज भारत "डिजिटल इंडिया", "मेक इन इंडिया", और "आत्मनिर्भर भारत" जैसी योजनाओं के जरिए वैश्विक आर्थिक मंच पर नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन अगर देश के युवा कुशल नहीं होंगे, तो ये योजनाएं केवल कागज़ों तक ही सीमित रह जाएंगी।

कौशल विकास क्यों आवश्यक है?
1. शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई:
शिक्षा प्रणाली में आज भी थ्योरी आधारित पाठ्यक्रम अधिक हैं, जबकि उद्योगों को व्यावहारिक और तकनीकी रूप से दक्ष कर्मियों की आवश्यकता है। बीएसी पास छात्र को डेटा ऐनालिटिक्स या साइबर सिक्योरिटी की जानकारी नहीं है, जबकि कंपनियों को इन क्षेत्रों में कुशल लोगों की आवश्यकता है।

2. तकनीकी विकास की तेज़ गति:
जैसे-जैसे नई तकनीकें आ रही हैं—जैसे 5G, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), IoT (Internet of Things)—वैसे-वैसे उद्योगों की मांग भी बदल रही है।
टेलीकॉम क्षेत्र में आज की सबसे बड़ी जरूरत है 5G तकनीकी ज्ञान वाले इंजीनियरों की, लेकिन परंपरागत इंजीनियरिंग डिग्रीधारी छात्रों को इसकी ट्रेनिंग नहीं मिलती।

TSSC: शिक्षा और उद्योग के बीच की कड़ी
टेलीकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल (TSSC) नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) के अंतर्गत काम करता है। इसका उद्देश्य युवाओं को दूरसंचार क्षेत्र में कुशल बनाना और उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुसार तैयार करना है।

इंटीग्रेटेड स्किल प्रोग्राम्स:

कॉलेजों में डिग्री के साथ ही तकनीकी मॉड्यूल्स को जोड़ा गया है, जैसे कि नेटवर्क मैनेजमेंट, क्लाउड कंप्यूटिंग, आदि।

इंटर्नशिप प्रोग्राम्स:

छात्र पढ़ाई के साथ-साथ उद्योगों में इंटर्नशिप करके अनुभव भी प्राप्त कर रहे हैं।
उदाहरण: राजस्थान के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र राहुल को टीएसएससी की मदद से एयरटेल में इंटर्नशिप मिली। 6 महीने के इस अनुभव के बाद राहुल को उसी कंपनी में फुल टाइम नौकरी मिल गई।

ट्रेन-द-ट्रेनर योजना:

केवल छात्र ही नहीं, शिक्षक भी प्रशिक्षित किए जाते हैं ताकि वे बदलती तकनीकों से अद्यतन रहें। इससे पाठन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

उद्योग की भागीदारी:
जियो, एयरटेल, एरिक्सन, नोकिया जैसी कंपनियां टीएसएससी के साथ मिलकर पाठ्यक्रम तैयार कर रही हैं। वे छात्रों को प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और सीधा रोजगार भी दे रही हैं।
झारखंड की एक ग्रामीण छात्रा सविता, जो पहले केवल कंप्यूटर की बेसिक जानकारी रखती थी, टीएसएससी की मदद से “नेटवर्क टेक्नीशियन” बनी और अब एयरटेल में कार्यरत है।
कौशल विकास से स्टार्टअप संस्कृति को भी बल
जब युवा कुशल होते हैं, तो उनमें स्वरोजगार और स्टार्टअप की भावना भी विकसित होती है। कौशल प्रशिक्षण उन्हें न केवल नौकरी पाने लायक बनाता है, बल्कि खुद का उद्यम शुरू करने का आत्मविश्वास भी देता है।
 दिल्ली का एक युवा विकास, जिसने मोबाइल रिपेयरिंग में टीएसएससी से ट्रेनिंग ली, आज खुद की दुकान चलाता है और 5 अन्य युवाओं को रोजगार देता है।

कौशल विकास आज भारत की सबसे बड़ी आवश्यकता है। केवल डिग्री नहीं, बल्कि रोजगार योग्य ज्ञान और तकनीकी दक्षता ही किसी राष्ट्र को सशक्त बना सकती है। TSSC जैसी संस्थाएं जब शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई को पाटने का कार्य करती हैं, तब केवल रोजगार ही नहीं बढ़ता, बल्कि आर्थिक विकास की गति भी तीव्र होती है।

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