जब राख एक जैसी हो, तो घमंड कैसा?"

संपादकीय 
6 मई 2025
 *"जब राख एक जैसी हो, तो घमंड कैसा?"* 
मनुष्य का जीवन चाहे कितना भी ऐश्वर्यशाली क्यों न हो, उसकी अंतिम परिणति राख ही होती है। अमीरी और गरीबी का भेद, ऐशोआराम और अभाव की सीमाएं— आखिर l मिट जाती हैं उस समय जब जीवन की अंतिम सांस ली जाती है। शरीर के जलने के बाद बचती है बस एक मुट्ठी राख, जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि मृत्यु के बाद सब समान हैं। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।

एक बार एक साधू द्वारा श्मशान में दो चिताओं की राख को देखना केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि जीवन का दार्शनिक और नैतिक विवेचन है। जब साधू कहता है कि "एक ने जीवन भर काजू-बादाम खाए, दूसरा दो वक़्त की रोटी को तरसता रहा, मगर दोनों की राख एक जैसी है," तो वह मानो इस संसार को आईना दिखा रहा होता है—कि हम जिस घमंड, ईर्ष्या और भेदभाव में जीवन गंवाते हैं, वह अंततः अर्थहीन है।
आज का समाज दिखावे, धन, पद और प्रतिष्ठा की दौड़ में इतना उलझ गया है कि मानवीय मूल्यों—सद्व्यवहार, सहानुभूति, विनम्रता और समानता—को पीछे छोड़ दिया है। यह आलेख हमें याद दिलाता है कि जीवन की सच्चाई बहुत ही साधारण और सीधी है: जो आया है, वह जाएगा और सबकी मंज़िल एक है।
धन और संसाधन केवल जीवन को सुविधाजनक बना सकते हैं, लेकिन वे किसी की आत्मा को ऊँचा नहीं कर सकते। एक ग़रीब इंसान की विनम्रता, उसका संघर्ष और उसका त्याग, एक अमीर के ऐश्वर्य से कहीं ज़्यादा मूल्यवान हो सकता है यदि उसमें मानवता न हो।
इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह जीवन के इस परम सत्य को स्वीकारे और अपने व्यवहार, सोच और दृष्टिकोण में समानता लाए। दूसरों को नीचा दिखाना, पद और पैसा दिखाकर घमंड करना, या दूसरों की दुःखद स्थिति पर उपेक्षा करना—ये सब अंत में उसी राख में खो जाते हैं जहाँ एक राजा और एक रंक की कोई पहचान नहीं रहती।
   जब मृत्यु के बाद सब कुछ समान हो जाता है, तो जीवन में क्यों न हम समानता, सहिष्णुता और सौहार्द को अपनाएँ?
अंततः पहचान उसी की रहेगी जिसने दूसरों के लिए कुछ किया, विनम्र रहा और अपनी मानवता को बनाए रखा।
"अंत की राख हमें सिखाती है कि जीवन में बड़प्पन केवल व्यवहार का होता है, पद या संपत्ति का नहीं।"

Comments

Popular posts from this blog

संवैधानिक इस्तीफा या मजबूरी का मंथन – उपराष्ट्रपति धनखड़ का कदम और लोकतंत्र की गूंज

"भोजन की थाली में हमारी सभ्यता का आईना"

पचेरी की बहू नीलम सोनी ने अंग्रेजी विषय में किया नेट जेआरएफ क्वालिफाइड।