फिर से देश को युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए”*

संपादकीय 
10 मई 2025

 *“फिर से देश को युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए”*
आज भारत एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ आंतरिक असुरक्षा और बाह्य तनाव की दोहरी चुनौती सामने है। देश के भीतर सामाजिक असहिष्णुता, वैचारिक विभाजन और मानसिक असुरक्षा का वातावरण है, तो सीमाओं पर पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियाँ और उसके सहयोगी राष्ट्रों की छद्म कूटनीति देश की संप्रभुता पर निरंतर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही हैं।

पाकिस्तान की नीति वर्षों से आतंक को राज्य-प्रायोजित हथियार के रूप में उपयोग करने की रही है। सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ, ड्रोन के माध्यम से शस्त्र व मादक पदार्थों की आपूर्ति, जम्मू-कश्मीर और पंजाब जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आतंक की जड़ें फैलाने का प्रयास—इन सबके पीछे पाकिस्तान की असफल राजनीति और भारत-विरोधी मानसिकता स्पष्ट दिखती है। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।

 चिंता का विषय केवल पाकिस्तान नहीं है, बल्कि उसके पीछे खड़े वे राष्ट्र हैं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस आतंकी नेटवर्क को सहयोग दे रहे हैं। तुर्की, चीन और कुछ इस्लामिक देशों का रणनीतिक समर्थन न केवल आतंक को सह देता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ एक 
नकारात्मक छवि गढ़ने का प्रयास भी करता है।
भारत को इस संकटकाल में "युद्ध" के नहीं, "बुद्ध" के मार्ग की आवश्यकता है—अर्थात् शक्ति और विवेक का संतुलन। यदि भारत केवल सैन्य प्रतिक्रिया पर केंद्रित रहेगा, तो यह उसी जाल में उलझ सकता है जो आतंकवाद फैलाने वाले बिछा रहे हैं। इसलिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें कूटनीति, सूचना युद्ध, आंतरिक स्थिरता और वैश्विक समर्थन की भूमिका प्रमुख होगी।

 *भारत को क्या करना होगा* 

1. कूटनीतिक मोर्चा मज़बूत करें – भारत को वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की दोहरी नीति को उजागर करते रहना होगा। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय सहयोग संगठनों में सक्रिय भागीदारी से भारत को नैतिक और राजनीतिक समर्थन मिल सकता है।

2. आतंरिक एकता पर विशेष ध्यान दें – आतंकवाद की जड़ें वहाँ पनपती हैं जहाँ समाज बंटा होता है। धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर लोगों को तोड़ने वाले तत्वों को जवाब केवल एक मजबूत सामाजिक ताने-बाने से दिया जा सकता है।

3. साइबर और वैचारिक युद्ध में दक्षता बढ़ाएँ – आज युद्ध केवल सीमा पर नहीं, इंटरनेट और मीडिया में लड़ा जा रहा है। फेक न्यूज़, प्रोपेगेंडा और साइबर हमलों से बचाव के लिए भारत को डिजिटल रणनीति पर निवेश करना होगा।

4. युवाओं को जोड़ें और जागरूक करें – राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा स्तंभ युवा वर्ग है। उन्हें शिक्षा, रोजगार और राष्ट्रप्रेम की भावना से जोड़कर हम आतंरिक असंतोष को समाप्त कर सकते हैं, जो अक्सर बाहरी दुश्मनों के लिए दरवाज़ा खोलता है।
भारत को बुद्ध की करुणा और विवेक के साथ रण नीति की सजगता अपनानी होगी। यह समय तलवार निकालने का नहीं, रणनीति गढ़ने का है। क्योंकि युद्ध क्षणिक विजय देता है, पर बुद्ध का मार्ग स्थायी समाधान।
“विजय केवल शस्त्रों से नहीं, श्रेष्ठ विचारों और आंतरिक एकता से मिलती है। भारत को चाहिए शांति का साहस और सुरक्षा की सजगता।”

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