हवा में बिखरता भरोसा: चूरू में वायुसेना के जगुआर क्रैश ने फिर खड़ा किया सवाल"

✍️ संपादकीय
10 जुलाई 2025 

"हवा में बिखरता भरोसा: चूरू में वायुसेना के जगुआर क्रैश ने फिर खड़ा किया सवाल"
राजस्थान के चूरू जिले में एक बार फिर आसमान से चीख सुनाई दी — यह कोई युद्ध नहीं था, बल्कि भारतीय वायुसेना का एक और जगुआर लड़ाकू विमान क्रैश हो गया। हादसे में पायलट और को-पायलट की दर्दनाक मौत हो गई। विमान का मलबा गांव में बिखरा पड़ा था और शवों के चिथड़े दूर-दूर तक फैल गए। यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, यह भारत की वायु सुरक्षा नीति, विमान रखरखाव और पायलट प्रशिक्षण प्रणाली की खामियों का एक और भयावह प्रमाण है। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।

चौंकाने वाली बात यह है कि यह पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में मिग-21, सुखोई, तेजस और जगुआर जैसे कई विमान तकनीकी खराबियों और अन्य कारणों से क्रैश हो चुके हैं। चूरू की घटना ने फिर से यह सवाल खड़ा किया है कि आखिर भारत की वायुसेना के पुराने विमानों को कब तक उड़ाया जाएगा?

जगुआर विमान, जो ब्रिटेन में 1960 के दशक में डिजाइन हुआ था और 1980 के दशक में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया — अब तकनीकी रूप से थका हुआ हो चुका है। फिर भी देश की सुरक्षा के नाम पर पायलटों की जान जोखिम में डालकर इन्हें उड़ाया जा रहा है।

क्या कोई पूछेगा— क्यों अब तक इन विमानों का प्रतिस्थापन नहीं हुआ? क्यों दुर्घटनाओं के बाद भी कोई बड़ी नीति-परिवर्तन नहीं होता?क्यों हर हादसे के बाद ‘जांच के आदेश’ ही सरकार का एकमात्र उत्तर बन जाता है?

चूरू की घटना में पायलट और को-पायलट की जान चली गई। उनके परिवारों के लिए यह असहनीय त्रासदी है। लेकिन क्या हमें सिर्फ श्रद्धांजलि देने और दो मिनट मौन रखने भर से संतोष हो जाना चाहिए? क्या पायलटों की जान की कीमत केवल प्रेस नोट और वादों में सिमटकर रह जाएगी?

यह भी चिंता का विषय है कि विमान का मलबा गांव में गिरा, जिससे स्थानीय नागरिकों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी। सौभाग्यवश कोई ग्रामीण हताहत नहीं हुआ, लेकिन अगली बार शायद किस्मत साथ न दे। अब समय आ गया है कि भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय युद्ध स्तर पर कार्य करें— पुरानी तकनीक वाले विमानों को रिटायर किया जाए। वायुसेना में शामिल हर विमान का तकनीकी ऑडिट हो पायलटों की ट्रेनिंग, फिटनेस और मनोवैज्ञानिक स्थिति की निरंतर जांच हो। हर हादसे की पारदर्शी, न्यायिक जांच हो — न कि खानापूर्ति।

 मेक इन इंडिया के तहत आधुनिक, सुरक्षित और स्मार्ट विमानों पर तेजी से काम हो।

क्योंकि जब एक जवान गिरता है, तो केवल उसका परिवार नहीं, पूरा राष्ट्र असहाय महसूस करता है।
देश की सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं, सिस्टम की जवाबदेही और ईमानदार नीयत से होती है।

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